द फॉलोअप डेस्क:
पलामू के पाटन थाना क्षेत्र के चर्चित प्रभात कुमार मेहता हत्याकांड में अब नया मोड़ सामने आया है। पुलिस ने मामले में शामिल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने और हत्या का खुलासा करने का दावा किया है। वहीं, मृतक प्रभात के भाई मनीष ने पुलिस की कार्रवाई पर ही गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मनीष ने आरोप लगाया है कि उसके भाई की हत्या में कुछ पुलिसकर्मियों और पुलिस से जुड़े लोगों की भी भूमिका हो सकती है। इस मामले में उसने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मुख्य सचिव को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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पुलिस ने ऐसे सुलझाई हत्या की गुत्थी
दरअसल, 25 जुलाई को पाटन थाना क्षेत्र में प्रभात कुमार मेहता के अपहरण का मामला दर्ज कराया गया था। इसके अगले दिन 26 जुलाई को पाण्डेयपुरा-करोरिया स्थित एक अर्द्धनिर्मित मकान से प्रभात का शव बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस ने अपहरण के मामले में हत्या की धाराएं जोड़ते हुए जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, तकनीकी अनुसंधान के आधार पर सबसे पहले मुख्य आरोपी राहुल कुमार उर्फ राहुल राम उर्फ राहुल चंद्रवंशी की पहचान की गई। उसकी लोकेशन बेंगलुरु में मिलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पलामू लाया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद पुलिस जांच में धर्मेंद्र कुमार की संलिप्तता सामने आने की बात कही गई। पुलिस ने धर्मेंद्र को हरियाणा के यमुनानगर से गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर पलामू लाकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दोनों आरोपियों से हत्या से जुड़ी जानकारी सामने आई और हत्या की वजह पुरानी रंजिश बताई गई। पुलिस का दावा है कि घटना वाले दिन राहुल और धर्मेंद्र प्रभात के घर पहुंचे थे। वहां से वे प्रभात को बाइक पर बैठाकर ले गए। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद तीनों ने ब्राउन शुगर का सेवन किया और फिर प्रभात पर ईंट से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई।

मनीष ने लगाए ये आरोप
लेकिन अब मृतक प्रभात के भाई मनीष ने पुलिस की इस कहानी पर सवाल खड़े किए हैं। मनीष का आरोप है कि उसके भाई की हत्या में कुछ पुलिसकर्मियों और पुलिस से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है। उसने अपने लिखित आवेदन में टाउन थाना के सिपाही राकेश सिंह, पांथर/चैनपुर थाना प्रभारी लालजी समेत टेक्निकल सेल से जुड़े एक व्यक्ति, जिसे वह छोटू के नाम से बताता है, पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मनीष का कहना है कि उसका भाई पुलिस के लिए मुखबिरी और एसपीओ के तौर पर काम करता था और पहले भी कुछ पुलिसकर्मियों से उसका विवाद हुआ था। इसी वजह से उसे आशंका है कि हत्या के पीछे केवल पुलिस द्वारा बताए गए आरोपी ही नहीं, बल्कि अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। मनीष ने यह भी सवाल उठाया है कि जिस व्यक्ति को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, वह अकेले इतनी बड़ी वारदात को कैसे अंजाम दे सकता है। इसी आधार पर उसने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। मनीष ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मुख्य सचिव को लिखित आवेदन भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है।
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मामले में पुलिस ने दिया ये बयान
वहीं, पलामू एसपी की ओर से इन आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। पलामू एसपी कपिल चौधरी के अनुसार, पुलिस ने मामले में अलग-अलग जांच टीमों का गठन कर वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से अनुसंधान किया। जांच के दौरान दोनों आरोपियों की पहचान हुई। उन्हें अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ में हत्या से जुड़ी जानकारी सामने आई है और हत्या के पीछे पुरानी रंजिश को वजह बताया गया है। ऐसे में पुलिस ने मृतक के भाई मनीष द्वारा लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना है। फिलहाल, इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। एक तरफ पुलिस दो आरोपियों की गिरफ्तारी और हत्या के खुलासे की बात कह रही है, तो दूसरी तरफ मृतक के भाई ने पुलिस की भूमिका पर ही गंभीर सवाल उठाते हुए उच्च स्तर पर जांच की मांग की है।