पलामू से खुशी ठाकुर की रिपोर्ट
करमा पर्व पर लोग खुशियां मना रहे थे, घरों में गीत गूंज रहे थे, बहनें करम डाली की पूजा कर रही थीं… लेकिन पलामू में इसी उत्सव के बीच कुछ परिवारों की दुनिया अचानक उजड़ गई। जिस दिन घरों में रौनक होनी चाहिए थी, उसी दिन मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में एक साथ करीब 10 शव पहुंचे। इन शवों में डूबने, सड़क हादसे और आत्महत्या के मामले शामिल हैं। सबसे दर्दनाक तस्वीर कोयल नदी से सामने आई, जहां 24 घंटे के भीतर करीब पांच बच्चों के डूबने की सूचना है। इनमें से चार बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं। सोचिए, जिन घरों में करमा पर्व का उल्लास अभी खत्म भी हीं हुआ, वहां अचानक बच्चों की मौत की खबर पहुंची होगी तो उन परिवारों पर क्या बीती होगी। कोयल नदी में डूबने से 18 साल के नीतीश कुमार सिंह, 22 साल के अमित कुमार ठाकुर, 12 साल के राजा सिंह, 16 वर्ष के विशाल पासवान, 8 साल के हेमंत कुमार सिंह की मौत हो गई। इन परिवारों में मातम पसरा है। सारा गांव गमगीन है। जहां कल करम गीत गूंज रहे थे, आज चीत्कार है।

करम डाल विसर्जन के दौरान 15 साल की सिंपी की मौत
पाटन थाना क्षेत्र के नानी झरिया में करम डाल विसर्जन के दौरान भी बड़ा हादसा हो गया। पानी में डूबने से 15 साल की सिंपी कुमारी की मौत हो गई। जिस करम डाल को लेकर परिवार और गांव की बेटियां पूजा और आस्था के साथ नदी-तालाब तक पहुंची थीं, उसी दौरान एक परिवार की बेटी हमेशा के लिए उनसे दूर चली गई। करमा पर्व के गीत और खुशियों के बीच अचानक चीख-पुकार मच गई। उधर सिंगरा में सड़क हादसे में भी एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं आत्महत्या का भी एक मामला सामने आने की जानकारी है। इन अलग-अलग घटनाओं के बाद अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में एक साथ करीब 10 शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है।

करमा की खुशियों के बीच हादसों ने छोड़े कई सवाल
सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात यह है कि यह सब करमा पर्व के आसपास हुआ, जब पूरा पलामू उत्सव के रंग में डूबा हुआ था। जिन हाथों में पूजा की थाली और करम डाली थी, उन्हीं परिवारों को कुछ घंटों बाद अपनों के शव देखने पड़े। परिवार अपने बच्चे को सुरक्षित घर लौटने का इंतजार कर रहा था और दरवाजे पर उसकी मौत की खबर पहुंच गई। क्या ये सिर्फ संयोग था कि करमा पर्व के दौरान इतने हादसे एक साथ सामने आए.. या फिर नदी, तालाब के आसपास होने वाले पर्व के आयोजनों में सुरक्षा को लेकर और ज्यादा सावधानी की जरूरत है.. करमा आस्था का पर्व है, लेकिन इस बार इसकी खुशियों के बीच सामने आई मौतों की तस्वीरें कई परिवारों के लिए ऐसी याद छोड़ गई हैं जिसे वे शायद कभी भूल नहीं पाएंगे।