पलामू
पलामू समाहरणालय में आयोजित जन समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने न सिर्फ अधिकारियों बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। गरीबी और मजबूरी से जूझ रही एक मां अपने डेढ़ साल के मासूम बच्चे को अनाथ आश्रम भेजने की बात लेकर उपायुक्त (DC) के पास पहुंची थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने प्रशासन के संवेदनशील पक्ष को दर्शाया। हर बुधवार की तरह इस सप्ताह भी पलामू समाहरणालय सभागार में जन समाधान दिवस का आयोजन किया गया। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत जनता की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान एक महिला अपनी फरियाद लेकर पहुंची। महिला ने बताया कि कम उम्र में ही उसके पति का निधन हो गया।

बच्चे से अलग होने की जरूरत नहीं
पति की मौत के बाद उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। डेढ़ वर्षीय बच्चे का पालन-पोषण करना उसके लिए बेहद कठिन हो गया है। मजबूरी इतनी बढ़ गई कि वह अपने बच्चे को किसी अनाथ आश्रम में भेजने का विचार करने लगी ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रह सके। महिला की दर्दभरी कहानी सुनते ही उपायुक्त भावुक हो गए। उन्होंने महिला को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उसके साथ खड़ा है और उसे अपने बच्चे से अलग होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उपायुक्त ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने महिला को विधवा पेंशन योजना से जोड़ने और प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया। साथ ही बच्चे के भरण-पोषण के लिए स्पॉन्सरशिप योजना के तहत चार हजार रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने को कहा।
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प्रशासन केवल शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं
डीसी ने महिला को समझाया कि सरकार की ओर से हर महीने कुल पांच हजार रुपये की सहायता मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने महिला को आत्मनिर्भर बनने और कोई छोटा रोजगार शुरू करने के लिए भी प्रेरित किया ताकि वह अपने बच्चे का बेहतर भविष्य बना सके। इस संवेदनशील पहल ने एक बार फिर साबित किया कि प्रशासन केवल शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण भी बन सकता है। जन समाधान दिवस में भूमि विवाद, सार्वजनिक रास्ता, पीएम आवास, दाखिल-खारिज, राजस्व, स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा और कल्याण विभाग से जुड़े कई मामलों की भी सुनवाई की गई। लेकिन एक मां और उसके मासूम बच्चे की यह कहानी पूरे जनता दरबार की सबसे भावुक तस्वीर बनकर सामने आई।