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पाकुड़ में बंगाली संगठन ने मनाई विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम की 127वीं जयंती, प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

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पाकुड़
आज मंगलवार को विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में बंगाली संगठन (पाकुड़ शाखा) के द्वारा सिद्धो कान्हू मुर्मू पार्क के समीप बंगाली समुदाय के लोगों ने विद्रोही कवि काजी नज़रुल इस्लाम की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके साथ ही उपस्थित लोगों ने कवि द्वारा लिखे गए गीतों का गायन और कविता पाठ भी किया। 
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जेल जाने वाले पहले कवि
बता दें कि विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम बांग्ला भाषा के महान कवि, संगीतकार और क्रांतिकारी थे। अपनी बेबाक और देशभक्तिपूर्ण लेखनी के लिए उन्हें 'विद्रोही कवि' कहा जाता था। उन्होंने अपनी कविताओं (जैसे 'विद्रोही') और 'धूमकेतु' नामक पत्रिका के माध्यम से ब्रिटिश शासन की कड़ी आलोचना की थी। पूर्ण स्वतंत्रता की मांग वाली कविता लिखने के कारण वे ब्रिटिश सरकार द्वारा जेल भेजे जाने वाले पहले भारतीय कवियों में से एक थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सद्भाव का गहरा संदेश छिपा था। 
'नजरुल गीति' से भड़काई देशभक्ति की ज्वाला
उन्होंने अपने जीवनकाल में 3000 से अधिक गीतों की रचना की, जिन्हें 'नजरुल गीति' कहा जाता है। इन गीतों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस में देशभक्ति की ज्वाला भड़काने का काम किया। उन्होंने हमेशा अपनी कविताओं के जरिए शोषित, दलित और सर्वहारा वर्ग की आवाज को बुलंद किया।

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