रांची
रांची जिले के कांके प्रखंड अंतर्गत नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 के निर्माण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डा. आशा लकड़ा शनिवार को नगड़ी पहुंचीं और मामले की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि यह भूमि 250 से अधिक आदिवासी परिवारों की आजीविका से जुड़ी है। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि यदि इस जमीन पर अस्पताल बनता है तो उनके पास न खेती बचेगी, न अंतिम संस्कार की जगह। वर्ष 2012 से जमीन की रसीद नहीं काटी जा रही और खेती पर प्रशासन ने रोक लगा दी है, जिससे लोग सड़क पर बिचड़ा तैयार करने को मजबूर हैं।

डा. लकड़ा ने कहा कि यह भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना ही प्रशासनिक दबाव में ली जा रही है। ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार के तहत भी अधिग्रहण से जुड़ी जानकारी मांगी थी, लेकिन विभाग के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। आयोग की ओर से यह मामला संज्ञान में लिया गया है। रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार, राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। साथ ही आयोग जल्द ही संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करेगा। डा. लकड़ा ने यह भी दोहराया कि अगर भूमि अधिग्रहण के पांच वर्षों तक कोई निर्माण नहीं हुआ हो तो भूमि स्वतः रैयत को वापस मिल जाती है।

राज्यपाल से की मुलाकात
इसके अलावा डा. आशा लकड़ा ने शनिवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से शिष्टाचार मुलाकात भी की। उन्होंने राज्यपाल को पेसा कानून, नगड़ी भूमि विवाद और आयोग की ओर से आदिवासी हितों में की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी। इस बैठक में एनसीएसटी की पांच सदस्यीय टीम भी मौजूद रही।
