हजारीबाग:
Hazaribagh News:हजारीबाग में शहर का कचरा अब गांव तक पहुंच गया है और कचरा डंपिंग यार्ड (Garbage dumping yard) को लेकर प्रशासन और ग्रामीण आमने-सामने हैं। हाईकोर्ट(High Court) के आदेश के बाद शहर के पुराने डंपिंग यार्ड को खाली कराया गया है। जिस जमीन (land) पर वर्षों से शहर का कचरा जमा होता था, उसे अब अंतरराज्यीय बस अड्डे (Inter-State Bus Terminals) के लिए चिन्हित किया गया है। इसके बाद नगर निगम के सामने रोज निकलने वाले कचरे के निस्तारण की चुनौती खड़ी हो गई है।
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मंडई में नई जगह चिन्हित, ग्रामीणों ने जताया विरोध
नगर निगम ने शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर मंडई गांव में कचरा डंपिंग यार्ड के लिए जमीन चिन्हित की है। जमीन चिन्हित होते ही ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि शहर के कचरे का समाधान गांव के बीच डंपिंग यार्ड बनाकर नहीं किया जा सकता। उनका विरोध सिर्फ जमीन को लेकर नहीं है, बल्कि सड़क, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े सवालों को लेकर भी है।
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10 फीट की सड़क पर दौड़ेंगे भारी कचरा वाहन, हादसे का डर
ग्रामीणों की सबसे बड़ी आपत्ति गांव की सड़कों को लेकर है। उनका कहना है कि मंडई की सड़कें करीब 10 फीट चौड़ी हैं, जबकि नगर निगम की कचरा ढोने वाली गाड़ियां बड़ी और भारी होती हैं। इन्हीं संकरी सड़कों से गांव के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मवेशी रोजाना गुजरते हैं। ऐसे में बड़े वाहनों की लगातार आवाजाही शुरू होने पर दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि संकरी सड़क पर कचरा वाहन से कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उनका कहना है कि डंपिंग यार्ड तक कचरा वाहनों की आवाजाही शुरू करने से पहले सड़क की क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही वाहन परिचालन को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था तय होनी चाहिए।
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कचरा जमा हुआ तो बदबू और बीमारी का खतरा
ग्रामीणों की दूसरी बड़ी चिंता कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग को लेकर है। उनका कहना है कि यदि शहर से लाए गए कचरे को मंडई में सिर्फ जमा किया गया और समय पर उसका निस्तारण या प्रोसेसिंग नहीं हुई, तो इलाके में दुर्गंध फैल सकती है। लंबे समय तक कचरा जमा रहने से गंदगी और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि डंपिंग यार्ड में कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण, नियमित सफाई और निगरानी की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर इसका असर न पड़े।
मवेशियों और खेतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
मंडई के आसपास खेत और ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां बड़ी संख्या में मवेशी चरते हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कचरा खुले में फैला या डंपिंग यार्ड की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रही तो मवेशी प्लास्टिक और अन्य कचरा खा सकते हैं। इससे उनके लिए खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीण चाहते हैं कि डंपिंग यार्ड की योजना में खेतों, जलस्रोतों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी ठोस प्रबंध किए जाएं।
पंचायत सचिवालय में बैठकों का दौर
विरोध के बीच मंडई पंचायत सचिवालय में सुबह से ही बैठकों का दौर जारी है। स्थानीय प्रशासन, नगर निगम के पदाधिकारी, ग्रामीण और समाजसेवी लगातार बातचीत कर रहे हैं। बैठक का उद्देश्य ग्रामीणों की आपत्तियों को सुनना और कचरा डंपिंग को लेकर सहमति का रास्ता निकालना है।
प्रशासन अलर्ट, दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी है। हजारीबाग सदर अंचल अधिकारी को दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है। संबंधित थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, ताकि विरोध के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
नगर निगम कई मांगों पर सहमत, ग्रामीण लिखित आश्वासन पर अड़े
बैठक के दौरान नगर निगम की ओर से ग्रामीणों की कई प्रमुख आपत्तियों और मांगों पर सहमति जताए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, ग्रामीण सिर्फ मौखिक आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि कचरे की प्रोसेसिंग, वाहनों की आवाजाही, सड़क सुरक्षा, दुर्गंध की रोकथाम और मवेशियों की सुरक्षा समेत सभी बिंदुओं को लिखित रूप में स्पष्ट किया जाए।
शहर साफ होगा, लेकिन क्या गांव की कीमत पर?
हजारीबाग का कचरा संकट अब शहर से निकलकर मंडई गांव की चौखट तक पहुंच गया है। पुराना डंपिंग यार्ड खाली हुआ तो नई जमीन चिन्हित की गई, लेकिन नई जगह के साथ कई नए सवाल भी खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—शहर को साफ रखने की कीमत क्या गांव को चुकानी पड़ेगी?
डंपिंग यार्ड बनाना नगर निगम की जरूरत हो सकती है, लेकिन इसके साथ ग्रामीणों की सुरक्षा, सड़क की क्षमता, कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग, पर्यावरण संरक्षण और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था भी जरूरी है। फिलहाल नगर निगम कई मांगों पर सहमति की बात कह रहा है, प्रशासन बातचीत में जुटा है और ग्रामीण लिखित आश्वासन पर अड़े हैं। अब मामला सिर्फ इस बात का नहीं है कि शहर का कचरा कहां डंप होगा, बल्कि यह भी अहम है कि मंडई के लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए डंपिंग यार्ड की व्यवस्था किस तरह की जाती है।