logo

बजट सत्र में बाबूलाल ने DGP नियुक्ति से लेकर भूमि अधिग्रहण तक पर उठाये सवाल

BABULAL36.jpg

रांची 

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार की नीतियों, भूमि अधिग्रहण, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए।
डीजीपी नियुक्ति के मुद्दे पर मरांडी ने कहा कि अनुराग गुप्ता को जिस तरह डीजीपी बनाया गया और बाद में हटाकर तदाशा मिश्र को नियुक्त किया गया, वह सेवा नियमों के विपरीत है। इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए उस पर चर्चा उचित नहीं होगी।
एसीबी की कार्यप्रणाली पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि शराब घोटाले में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। उन्होंने इसे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी बताया।

मरांडी ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार द्वारा तैयार दस्तावेज होता है और उसमें सरकार की बेबसी झलक रही थी। उन्होंने कहा कि जब अभिभाषण में ही स्पष्ट दिशा नहीं है, तो उस पर संशोधन देने का औचित्य क्या है।
भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर उन्होंने जसीडीह, दुमका के अमरापाड़ा और गिरिडीह के तीसरी ब्लॉक का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उद्योग और कोल ब्लॉक के नाम पर आदिवासियों की खेती योग्य जमीन छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि उद्योग बंजर भूमि पर लगाए जाएं, न कि किसानों और आदिवासियों की उपजाऊ जमीन पर। उन्होंने मांग की कि विस की एक कमेटी बनाकर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कराया जाए। मरांडी ने कहा कि संथाल परगना में जमीन ही लोगों की पूंजी और आजीविका का साधन है, ऐसे में पुनर्वास के बिना बेदखली न्यायसंगत नहीं है।


रिम्स-2 परियोजना को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि पचास साल पहले अधिग्रहित जमीन पर आज खेती हो रही है, तो वहां निर्माण से पहले वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। सूचना आयुक्त के पद वर्षों से खाली रहने का मुद्दा उठाते हुए मरांडी ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बने संवैधानिक प्रावधानों का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी मरांडी के आरोपों का जवाब दिया और भूमि अधिग्रहण कानून तथा पूर्व सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाए। सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।

वहीं, धान खरीद के लक्ष्य को पूरा नहीं करने की बात करते हुए कहा कि किसान बताते हैं कि उनका धान खरीद ही नहीं हुआ. डीसी से पूछा तो बताया कि गोदाम भरा हुआ है. मार्च से खरीदेंगे. दो-तीन साल से यही हाल है. बिचौलियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसपर मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि इस साल सरकार बड़े पैमाने पर धान खरीद रही है. 22-23, 24-25 में सुखार था. इसलिए नहीं खरीद सका. इसपर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मार्च में आप लोग बिचौलियों से धान खरीदेंगे. क्योंकि किसान को तो अभी बेचना है.

Tags - Land Acquisition Issue DGP Appointment Row ACB Investigation Tribal Land Rights Governance Crisis