द फॉलोअप डेस्क
झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक को अंजाम दिया है। पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगली क्षेत्र में हुई भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने कुल 17 नक्सलियों को मार गिराया है। इस ऑपरेशन की कमान चाईबासा जिला पुलिस, कोबरा 209 BN, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के संयुक्त नेतृत्व में थी। यह सफलता तब मिली जब पुलिस को सूचना मिली कि नक्सली संगठन भाकपा (माओ) के शीर्ष नेता किसी अप्रिय घटना को अंजाम देने के लिए छोटानागरा थाना क्षेत्र में सक्रिय हैं।

इस मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान कर ली गई है, जिनमें संगठन के सबसे खूंखार और शीर्ष नेता शामिल थे। मुख्य रूप से अनल उर्फ पतिराम मांझी (CCM) मारा गया है, जिस पर झारखंड सरकार ने 1 करोड़, ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ और NIA ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था । इसके अलावा, अनमोल उर्फ सुशांत (BJSAC) जिस पर झारखंड में 25 लाख और ओडिशा में 65 लाख का इनाम था, वह भी ढेर हो गया है । अन्य प्रमुख मृतकों में अमित मुण्डा (झारखंड में 15 लाख और ओडिशा में 43 लाख का इनामी) , पिन्टु लोहरा (5 लाख इनामी) , लालजीत उर्फ लालु (5 लाख इनामी) , समीर सोरेन (5 लाख इनामी) , और रापा उर्फ पावेल (ओडिशा में 32 लाख का इनामी) शामिल हैं । इनके साथ ही कई अन्य ACM और कैडर स्तर के नक्सली भी मारे गए हैं। मुठभेड़ के बाद चलाए गए सघन तलाशी अभियान में सुरक्षा बलों को नक्सलियों के पास से घातक हथियारों का जखीरा मिला है। बरामदगी की सूची में 04 AK/AKM राइफल, 04 इंसास (INSAS) राइफल, 03 एस०एल०आर० (SLR) और 03 .303 राइफल शामिल हैं । इनके साथ ही भारी मात्रा में कारतूस और नक्सलियों द्वारा दैनिक उपयोग में लाए जाने वाले सामान भी बरामद किए गए हैं । यह बरामदगी दर्शाती है कि नक्सली किसी बड़े हमले की तैयारी में थे।
यह ऑपरेशन 22 और 23 जनवरी 2026 को लगातार दो दिनों तक चला। कुमडीह के जंगली इलाकों में जब नक्सलियों ने पुलिस को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू की, तो सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई की और अदम्य साहस का परिचय दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस 'मेघाबुरु' अभियान से माओवादी संगठन की कमर टूट गई है और सारंडा क्षेत्र में उनकी गतिविधियों में भारी कमी आएगी। पिछले तीन वर्षों में चाईबासा पुलिस ने 183 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है और कई नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए हैं, जिससे नक्सलियों का दायरा लगातार सिमट रहा है। अंत में, प्रशासन ने फिर से अपील की है कि नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।
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