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घाघीडीह केंद्रीय कारा  : जेल की चारदीवारी में फिटनेस का इंतजाम, मासूमों के लिए बचपन का ठिकाना

जेल की चारदीवारी में फिटनेस का इंतजाम, मासूमों के लिए बचपन का ठिकाना

द फॉलोअप, जमशेदपुर:

Jharkhand News: जेल की ऊंची दीवारों के बीच बंदियों को फिट रखने और उनके साथ रह रहे मासूम बच्चों को बचपन का माहौल देने की पहल जमशेदपुर के घाघीडीह केंद्रीय कारा (Ghaghidih Central Jail) में की गयी है। जेल प्रशासन ने महिला और पुरुष बंदियों के लिए अलग-अलग ओपन जिम (Open Gym) की शुरुआत की है। वहीं, महिला बंदियों (Female prisoners) के साथ रह रहे छह छोटे बच्चों के लिए खेलकूद और प्रारंभिक शिक्षा की सुविधाओं से लैस एक क्रेच (Creche) भी खोला गया है। शुक्रवार को सादे समारोह में इन सुविधाओं की शुरुआत की गयी। मौके पर पूर्वी सिंहभूम जिले के डीसी राजीव रंजन, (DC Rajiv Ranjan) डीडीसी नागेंद्र प्रसाद, एडीसी अनुराग तिवारी, एसडीओ अर्नव मिश्रा और जेल अधीक्षक अजय प्रजापति मौजूद रहे।

घाघीडीह केंद्रीय कारा में 1525 बंदी

सुविधाओं के शुभारंभ के बाद डीसी ने अधिकारियों के साथ जेल परिसर का निरीक्षण (Inspection of the jail premises) किया। उन्होंने बंदियों को उपलब्ध करायी जा रही खान-पान, स्वास्थ्य सेवा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। जेल अधीक्षक अजय प्रजापति ने बताया कि वर्तमान में घाघीडीह केंद्रीय कारा में 1525 बंदी हैं। इनमें 60 महिला बंदी और उनके साथ रह रहे छह छोटे बच्चे शामिल हैं। जेल में लंबे समय तक रहने के दौरान शारीरिक गतिविधियां सीमित होने से बंदियों में निष्क्रियता और मानसिक तनाव (Mental stress) की स्थिति बन सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए ओपन जिम की शुरुआत की गयी है। इसके तहत पुरुष और महिला बंदियों के लिए अलग-अलग ओपन जिम की व्यवस्था की गयी है।

जेल का माहौल उनके बचपन और शुरुआती शिक्षा में बाधा न बने

जेल प्रशासन (Prison Administration) का उद्देश्य बंदियों को नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ना है, ताकि वे शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के साथ सकारात्मक दिनचर्या का हिस्सा बन सकें। महिला बंदियों के साथ रहने वाले छह छोटे बच्चों के लिए शुरू किया गया क्रेच इस पहल का अहम हिस्सा है। यहां बच्चों के खेलने के लिए खिलौनों के साथ प्रारंभिक शिक्षा (Elementary Education) की व्यवस्था की गयी है। बच्चों के लिए ऐसा माहौल तैयार किया गया है, जहां वे अपनी उम्र के अनुरूप खेल और सीखने की गतिविधियों में शामिल हो सकें। जेल प्रशासन के अनुसार, इन बच्चों का जेल में रहना उनकी अपनी परिस्थितियों का परिणाम नहीं है। इसलिए उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। क्रेच के जरिये कोशिश की गयी है कि जेल का माहौल उनके बचपन और शुरुआती शिक्षा में बाधा न बने।

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