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सत्ता और सचिवालय का सच : दो सिपाही के लिए एक एसपी

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जीतेंद्र कुमार
एक पुरानी कहावत है। पावर है तो कुछ भी करब। देश में पावरफुल लोगों ने ऐसा करके दिखाया भी है। फिर झारखंड इससे अछूता कैसे रह सकता है। यहां भी पावर मिला है तो कुछ भी किया गया है। पूर्व में ऐसा किया गया था तो हाल में फिर दुहराया गया है। गढ़वा में इस सरकार के एक मंत्री ने तीन पंचायतों का एक प्रखंड बनवा लिया था। उसी आधार पर राज्य के कई माननीय आज भी अपने राजनीतिक हित को केंद्र में रखते हुए अक्सर विधानसभा में नये प्रखंड, पंचायत और अनुमंडल बनाने की लगातार मांग करते रहते हैं। अब हाल ही में सरकार ने इसी तरह का एक फैसला किया है। चतरा में डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय का निर्माण होगा। बहुत अच्छी बात है। विश्वविद्यालय बनेगा तो उच्च शिक्षा का प्रकाश फैलेगा। प्रकाश फैलेगा तो क्षेत्र के युवक-युवतियों का ज्ञान बढ़ेगा। ज्ञान बढेगा तो क्षेत्र में जागृति आएगी। फिर सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी भी तो यही है।


 लेकिन आपको मालूम है, यहां पहले से मात्र एक अंगीभूत महाविद्यालय है। उसका नाम चतरा कॉलेज चतरा है। हाल में एक महिला कॉलेज का निर्माण किया गया है। यह अभी अल्पव्यस्क है। इस तरह दो महाविद्यालयों पर एक विश्वविद्यालय का गठन होगा। अब भला किसी दूसरे क्षेत्रों में भी एक और दो कॉलेजों के ऊपर किसी नये विश्वविद्यालय के निर्माण की मांग हो तो कहीं से अनुचित नहीं कहा जा सकेगा। याद होगा पहले राज्य में केवल एक रांची विश्वविद्यालय था। बाद में प्रमंडलवार विश्वविद्यालयों का गठन किया गया। उसके बाद उत्तरी छोटानागपुर में दो विश्वविद्यालय बने। हजारीबाग में बिनोवा भावे विश्वविद्यालय और धनबाद में विनोद बिहारी कोयलांचल विश्वविद्यालय। अब उम्मीद की जा सकती है कि उच्च शिक्षा का अलख जगाने के लिए राज्य सरकार प्रत्येक जिले में एक एक विश्वविद्यालय के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी।

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