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बोकारो और हजारीबाग की तर्ज पर हुआ रांची में लगभग 3 करोड़ का पशुपालन घोटाला

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द फॉलोअप, रांची
रांची में भी ट्रेजरी घोटाला हुआ है। इंस्टीट्युट ऑफ एनिमल हेल्थ प्रोडक्शन कांके,रांची कार्यालय के लेखापाल मुनिंदर कुमार और दूसरे कर्मी संजीव कुमार द्वारा कोषागार से भुगतान के लिए बने कुबेर पोर्टल में छेड़छाड़ कर लगभग तीन करोड़ की फर्जी निकासी की गयी है। 13 अप्रैल को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 में हुए वेतनादि के भुगतान की प्रारंभिक जांच के क्रम में यह मामला उजागर हुआ। फर्जी निकासी की जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त के निर्देश पर कार्यपालक दंडाधिकारी मो जफर ने कोतवाली थाने में लेखापाल मुनिंदर कुमार और संजीव कुमार के विरुद्ध कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। इसके बाद पुलिस ने मुनिंदर को गिरफ्तार कर लिया है। संजीव की तलाश जारी है। सूत्रों का कहना है कि अन्य वर्षों में राज्य सरकार के अन्य कार्यालयों से निकाली गयी राशि की पूरी जांच के बाद फर्जी निकासी की राशि और आरोपियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।


प्राथमिकी में कहा गया है कि 13 अप्रैल को ट्रेजरी से हुई तीन वित्तीय वर्षों में वेतन मद की राशि निकासी की जांच की गयी। उसमें इंस्टीट्युट ऑफ एनिमल हेल्थ प्रोडक्शन कांके,रांची के लेखापाल मुनिंदर कुमार ने कुबेर पोर्टल में छेड़छाड़ कर वेतन मद की राशि को बढ़ा कर एसबीआई के बैंक एकाउंट-1175766109 और एक्सिस बैंक के बैंक एकाउंट 919010086568922 में एक करोड़ 52 लाख 43 हजार 572 रुपए की फर्जी निकासी की गयी। इसी तरह उसी कार्यालय के कर्मी संजीव कुमार द्वारा भी एक्सिस बैंक के एकाउंट नंबर -923010010228484 में फर्जी निकासी के माध्यम से एक करोड़ 41 लाख 79 हजार 480 रुपए क्रेडिट कराया गया। 


मालूम हो कि झारखंड में पहले भी पशुपालन घोटाला हो चुका है। अविभाजित बिहार के समय झारखंड के विभिन्न जिलों के कोषागारों से पशुपालन विभाग के विभिन्न कार्यालयों द्वारा अरबों रुपए की अवैध निकासी की गयी थी। इस घोटाले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, जगन्नाथ प्रसाद सहित दर्जनों नेताओं, अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं को जेल जाना पड़ा। रांची के कोषागार से इस तरह की फर्जी निकासी का मामला प्रकाश में आने के बाद सरकार के समक्ष गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। कुबेर पोर्टल और कोषागार से होनेवाले भुगतान से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही या संलिप्तता की उच्चस्तरीय जांच अत्यावश्यक माना जाने लगा है। हालांकि पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने ट्रेजरी घोटाले की सीआईडी जांच कराने की बात कही थी। लेकिन आज तक सीआईडी जांच के आदेश अधिसूचित नहीं हुए हैं।

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