द फॉलोअप डेस्क
शनिवार को जमीन घोटाला केस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ के दौरान सीएम आवास के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तैनाती को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने गंभीरता से लिया है। इस मामले को लेकर सीएमओ ने गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय से पूरी जानकारी मांगी है। सीएमओ की ओर से गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय से पूछा गया है कि कैसे सीआरपीएफ के जवान प्रतिबंधित इलाके में आ गए। इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

सीआरपीएफ के आईजी पर लगाए गंभीर आरोप
सीएमओ से पहले रविवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा ओर से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तैनाती को राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश बताया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कहा कि यह संभवत मौजूदा सरकार को अपदस्थ कर यहां राष्ट्रपति लगाने की साजिश के तहत किया गया प्रयास था। झामुमो ने कहा कि जब ईडी की कार्रवाई के मद्देनजर रांची जिला प्रशासन ने ईडी अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। उनके कार्यालय को पर्याप्त सुरक्षा दी। विधि-व्यवस्था संभालने के लिए 2 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और वरीय दंडाधिकारियों की नियुक्ति की गई थी तो वहां सीआरपीएफ जवानों की तैनाती का क्या औचित्य था। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसे पूर्व नियोजित साजिश बताते हुए सीआरपीएफ के आईजी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। झामुमो का आरोप है कि आईजी चाहते थे कि जवानों और प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं में मारपीट हो।

झामुमो ने इसे भड़काऊ और गैरकानूनी कदम बताया
गौरतलब है कि शनिवार को जब ईडी के अधिकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके कांके रोड स्थित सरकारी आवास में पूछताछ कर रहे थे, उस दौरान कई बसों में भरकर सीआरपीएफ के जवान आए थे। उनका वहां मौजूद झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थकों ने विरोध किया। कुछ देर के बाद सीआरपीएफ के जवान लौट गए। झामुमो ने आरोप लगाया कि सीआरपीएफ जवान उनके कार्यकर्ताओं से भी उलझे। झामुमो ने इसे भड़काऊ और गैरकानूनी कदम बताया। पार्टी का यह भी कहना है कि यदि कार्यकर्ताओं ने सयंम नहीं बरता होता तो हिंसक परिस्थिति उत्पन्न हो सकती थी।
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