रांची
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आने वाला राज्य बजट झारखंड की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने प्रोजेक्ट बिल्डिंग में हुई प्री-बजट बैठक में लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार उन पर कोई अतिरिक्त कर बोझ नहीं डालेगी। सरकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने का काम आंतरिक संसाधनों से किया जाएगा। हेमंत सोरेन ने जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई बंद होने पर केंद्र सरकार के फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने कहा, "कुछ राज्यों के लिए जीएसटी फायदेमंद है तो कुछ के लिए नुकसानदायक। पहले केंद्र सरकार ने मुआवजा दिया, लेकिन अब यह भी खत्म कर दिया गया है। अब सभी राज्यों को अपने संसाधन खुद जुटाने होंगे।"
मुख्यमंत्री ने 'मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना' की सराहना की, जिसके तहत राज्य की 56 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने ₹2,500 दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के जरिए हर साल ₹25,000 से ₹26,000 करोड़ खर्च करती है, जबकि झारखंड अकेले ₹16,000 करोड़ खर्च करने की तैयारी कर रहा है।" उन्होंने दोहराया कि राज्य के लोगों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा और सरकार अपने संसाधनों को सही ढंग से इस्तेमाल करेगी।
राज्य वित्त विभाग ने आगामी बजट को तैयार करने के लिए पिछले पंद्रह दिनों में जनता से सुझाव लिए। 16 जनवरी तक डिजिटल पोर्टल के जरिए 1,100 से ज्यादा सुझाव प्राप्त हुए, साथ ही विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किए। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट में झारखंड को वित्तीय स्थिति के मामले में देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल किया गया है। वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने बताया कि 2015-19 के दौरान झारखंड 11वें स्थान पर था, लेकिन 2022-23 में यह 18 राज्यों में चौथे स्थान पर पहुंच गया।
अर्थशास्त्री हरीश्वर दयाल ने बताया कि अगले वित्तीय वर्ष में राज्य की प्रति व्यक्ति आय ₹1.14 लाख होने का अनुमान है और 2029-30 तक झारखंड को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य सचिव अल्का तिवारी ने कहा कि बजट योजना के दौरान सरकार की आय का यथार्थवादी आकलन जरूरी है। इसके अलावा, अनुपयोगी सरकारी ढांचे के सही इस्तेमाल की कार्ययोजना भी बनाई जा रही है।