द फॉलोअप डेस्क
स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच 108 एम्बुलेंस सेवा की हकीकत शुक्रवार को उस समय सामने आई, जब नौ माह की गर्भवती महिला को बिना स्ट्रेचर वाली एम्बुलेंस से बेड़ो से रांची सदर अस्पताल लाया गया। एम्बुलेंस में स्ट्रेचर नहीं होने के कारण महिला को पूरे रास्ते कभी बैठकर तो कभी खड़े होकर सफर करना पड़ा।
प्रसूता जगरानी कुजूर को प्रसव के लिए बेड़ो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रांची सदर अस्पताल रेफर किया गया था। उनके साथ एम्बुलेंस में पति और अन्य परिजन भी मौजूद थे। परिजनों ने बताया कि रास्ते भर वे जगरानी को सहारा देते रहे, ताकि वह गिर न जाए। बेड़ो से रांची सदर अस्पताल पहुंचने में एम्बुलेंस को करीब 1 घंटा 35 मिनट का समय लगा। इस दौरान प्रसूता दर्द से कराहती रही, लेकिन एम्बुलेंस में बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं थी। बताया गया कि जिस एम्बुलेंस से मरीज को लाया गया उसका नंबर JH01FL-8653 है। एम्बुलेंस चालक ने भी स्वीकार किया कि इस वाहन में पिछले करीब छह महीने से स्ट्रेचर नहीं है। ऐसे में आपातकालीन सेवा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
