हजारीबाग:
केरेडारी प्रखंड अंतर्गत बुंडू खपियां गांव के जंगलों में 15 लाख के इनामी शहदेव महतो उर्फ अनुज और 10 लाख के इनामी रंजीत गंझू समेत 4 माओवादियों का मुठभेड़ में मारा जाना झारखंड पुलिस की बड़ी कामयाबी है। इस सफलता से पारसनाथ की पहाड़ियों से हजारीबाग के चतरा संघरी घाटी और कुंदा के जंगलों तक माओवादियों का लाल आतंक अब समाप्ति की ओर है। हजारीबाग पुलिस का ऐसा मानना है कि इस कामयाबी से झारखंड का बड़ा इलाका अब नक्सलमुक्त हो चुका है। जो थोड़े माओवादी जंगल में छिपे हैं, उनकी भी घेराबंदी जारी है। सुरक्षाबलों ने चेतावनी दी है कि या तो नक्सली आत्मसमर्पण करके मुख्यधारा में शामिल होने का रास्ता चुनें, अन्यथा जंगल में पुलिस की गोली खाने को तैयार रहें। तीसरा विकल्प नहीं है।

बुंडू खपियां गांव के पास जंगल में एनकाउंटर
गौरतलब है कि 17 अप्रैल की दोपहर को तकरीबन 1 बजे हजारीबाग जिला के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत बुंडू खपियां गांव के पास जंगलों में माओवादी दस्ते की मौजूदगी की सूचना मिली थी। एसपी अंजनी अंजन को मिली इस सूचना के आधार पर जिला पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी की। बताया जाता है कि खुद को घिरा देख नक्सलियों ने फायरिंग झोंक दी। जवानों ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की। करीब 1 घंटे चली मुठभेड़ के पश्चात सर्च ऑपरेशन में एक महिला समेत 3 नक्सलियों के शव मिले। मारे गए नक्सलियों में शहदेव महतो, रंजीत गंझू, बुधन करमाली और महिला नक्सली नताशा शामिल है। नताशा मूलरूप से गढ़चिरौली की रहने वाली थी। बुधन, गढ़वा का रहने वाला था।

सारंडा के बाद सर्वाधिक नक्सल प्रभावित इलाका
गौरतलब है कि हजारीबाग एसपी अंजनी की मिली गुप्त सूचना पर चले इस इस अभियान से पारसनाथ-लुगूझुमरा हजारीबाग चतरा सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय माओवादी दस्ते का पूर्ण रूप से सफाया हो चुका है। झारखंड के लिए सारंडा के बाद ये इलाका अत्यधिक नक्सली प्रभावित इलाका था जहां आए दिन नक्सलियों की गतिविधियां सुनने में आती थी जिससे ग्रामीण इलाके के लोग दहशत में रहने के लिए मजबूर थे। विकास कार्यों पर नक्सलियों द्वारा मांगे जाने वाले लेवी की नजर लगी रहती जो माओवादियों के खात्मे के बाद सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है। सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने एके 47, कोल्ट एआर 15 राइफल और इंसास बरामद किया।