जीतेंद्र कुमार
जब साजन इस पार हो और सजनी उस पार, तो जवानी में क्या बीतती है, यह कोई गुप्ता जी से पूछे। गुप्ता जी की बेचैनी इससे भी दिखती है कि वह अक्सर मिलने के लिए विदेश भागने की जुगाड़ में रहते हैं। अक्सर विदेश जाने के लिए छुट्टी मांगने पर सरकार भी खींझ उठती है। लेकिन उनकी मनोवैज्ञानिक मजबूरी को देखते हुए सरकार छुट्टी स्वीकृत भी करती है। साहब जब शासन-प्रशासन के सामान्य पदों पर पदस्थापित रहते हैं तो सरकार को उन्हें छुट्टी देने में बहुत परेशानी नहीं होती। साहब के लिए भी विदेश भागना आसान रहता है। लेकिन जिले के कप्तान की जिम्मेदारी मिलती है तो मामला उलझ जाता है। मन दोहरे लोभ में फंस जाता है। साहब अभी जिले के कप्तान पद पर ही पदस्थापित हैं। इसलिए खुशी और दुखी के जंजाल में फंसे हैं।

उनके कैडर के लोगों का कहना है कि गुप्ता जी ने इस आफत को खुद ही मोल लिया है। वह खुद तो आईएएस कैडर के हैं, शादी आईएफएस कैडर से कर ली। अगर अपनी ही कैडर की अधिकारी से शादी करते तो इस तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़ती। क्योंकि पति-पत्नी एक ही कैडर के अधिकारी हों और दो अलग अलग राज्यों में उनकी सेवा आवंटन है तो केंद्र सरकार इसका समाधान निकाल देता है। पति पत्नी का एक ही राज्य का कैडर कर देता है। राज्य में अखिल भारतीय सेवा के कई ऐसे अधिकारी हैं। हाल ही में प्रीति रोहिला का पश्चिम बंगाल से झारखंड कैडर हुआ भी है। लेकिन आईएफएस कैडर की अधिकारी से शादी करने पर उनका पदस्थापन तो विदेश में ही होगा। इसलिए सजनी हाल में श्रीलंका में पदस्थापित थी। इसलिए गुप्ता जी को बार बार श्रीलंका जाने को मन बेचैन हो उठता था। इस तरह उन्हें समुद्र पार जाने में भी दिक्कत है, नहीं जाने में भी।