रांची
मांडर मुड़मा स्थित ऐतिहासिक पाड़हा जतरा भूमि की बंदोबस्ती (Land Settlement) और विवाद (Dispute) को लेकर राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा द्वारा आज प्रेस क्लब रांची में संवाददाता सम्मेलन (Press Conference) का आयोजन किया गया। केंद्रीय प्रवक्ता संजय पाहन ने कहा कि पाड़हा जतरा आदिकाल से छोटानागपुर के मूल आदिवासी (Indigenous Tribes), उरांव और मुंडा, के समागम का ऐतिहासिक धरोहर (Historical Heritage) है, जो पाड़हा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था (Traditional Self-Governance System) का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि परंपरागत व्यवस्था के तहत यह स्थल सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का परिचायक भी है। पाहन ने कहा, पाड़हा जतरा का आयोजन लगभग 65 एकड़ भूमि पर लंबे समय से होता रहा है। भूमि के सीमांकन और भूमि अधिग्रहण एवं बंदोबस्ती को लेकर समय-समय पर झारखंड सरकार को लिखित आवेदन दिया गया। इसके आधार पर अंचल अधिकारी द्वारा वर्ष 2014, 2015 और 2018 में जांच प्रतिवेदन दिया गया। इसके बावजूद रांची जिला प्रशासन के स्तर पर भूमि अधिग्रहण एवं भूमि बंदोबस्ती का मामला लंबित है, जिसके कारण समय-समय पर रैयतों द्वारा मकान बनाने को लेकर विवाद उत्पन्न होता है और मनगढ़ंत आरोप लगाकर केस-मुकदमे किए जाते हैं।

किसी भी पदाधिकारी का कोई मतभेद और लड़ाई नहीं है
उन्होंने कहा कि बिरसा उरांव से राजी धर्मगुरु बंधन तिग्गा एवं राजी पाड़हा प्रार्थना सभा भारत के किसी भी पदाधिकारी का कोई मतभेद और लड़ाई नहीं है। बल्कि उनसे बार-बार उनकी भूमि, जिसका खाता नंबर 101, प्लॉट नंबर 349 है, को जतरा के लिए बेचने या उसके स्थान पर किसी अन्य जगह जमीन लेने का अनुरोध किया गया, ताकि आदिवासी समुदाय की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत पाड़हा जतरा मुड़मा बची रहे। लेकिन वे हमेशा टाल-मटोल करते रहे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर केस-मुकदमे करते रहे। कहा, यही नहीं, स्थानीय ग्रामसभा द्वारा जतरा स्थल की भूमि पर किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद उक्त भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जो लोगों की भावना के खिलाफ है। बिरसा उरांव द्वारा हाईकोर्ट में किए गए कंटेम्प्ट केस पर न्यायालय द्वारा कोई निर्णय नहीं दिया गया, बल्कि उसे ड्रॉप कर दिया गया है।
जल्द आवंटित की जाए भूमि
उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि 2018 से भूमि अधिग्रहण और भूमि बंदोबस्ती का मामला, जो रांची के उपायुक्त और अपर समाहर्ता के पास लंबित है, उसे जल्द आवंटित कराया जाए। इस मौके पर आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव, गंगू पाहन, दिनेश मुंडा, बब्लू मुंडा, रंजीत उरांव, क्रांतिक उरांव सहित अन्य शामिल थे।
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