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जंगल में जमीन पर बैठकर सखुआ के पत्ते में दाल-भात खाती दिखीं सांसद जोबा मांझी, विधायक बेटे भी थे साथ

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द फॉलोअप डेस्क:

जमीन पर बैठकर सखुआ पत्ता के पत्तल पर पर भोजन कर रहीं इस महिला को जानते हैं आप। शायद आप में से बहुत लोग जानते होंगे। जो नहीं जानते हैं, उनको बता दूं कि ये कोई आम आदिवासी महिला नहीं हैं। इनका नाम जोबा मांझी है। इनके पास बैठे युवक का नाम जगत मांझी है। जगत मांझी जोबा मांझी के बेटे हैं। जोबा मांझी चाईबासा संसदीय सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद हैं। जगत मांझी मनोहरपुर विधानसभा से झामुमो के विधायक हैं। मां सांसद और बेटा विधायक, लेकिन कोई तामझाम नहीं। कोई प्रोटोकॉल नहीं। ना तो यहां छप्पन भोग है और ना ही आलीशान रेस्तरां।

सांसद मां और उनका विधायक बेटा, आम आदिवासियों के बीच पंगत में बैठकर सखुआ के पत्तल पर भोजन कर रहे हैं। लोगों से संवाद भी जारी है।

लो-प्रोफाइल रहना पसंद करती हैं जोबा मांझी
यकीन मानिए, यह दिखावा नहीं है। जो लोग करीब से जोबा मांझी को जानते हैं, वो मानेंगे कि वह ऐसे ही लो-प्रोफाइल रहना पसंद करती हैं। जहां तक मुझे यकीन है, जोबा मांझी को पता भी नहीं होगा कि उनका वीडियो शूट किया जा रहा है। यदि उन्हें भनक भी लगती तो ऐसा करने से रोक देतीं। जोबा मांझी अपनी सादगी को सोशल मीडिया पीआर बनाना पसंद नहीं करतीं। 

सादगी पसंद जीवन जीती हैं सांसद जोबा मांझी
लोकसभा सांसद जोबा मांझी और विधायक जगत मांझी का यह वीडियो बताने के लिए काफी है कि जनप्रतिनिधि होकर भी सादगी से रहा जा सकता है। बिना तामझाम, काफिला, भीड़, माइक और हूटर के बिना भी जिंदगी जी जा सकती है। जंगल में जमीन पर बैठकर सखुआ के पत्ते में दाल, भात और तरकारी का स्वाद लिया जा सकता है। आपको यकीन ना हो तो जोबा मांझी का सोशल मीडिया हैंडल देख आइएगा। ना तो आपको यह तस्वीर दिखेगी और ना ही कहीं लिखा होगा कि आज फलां गांव में आदिवासियों संग भोजन किया। 

मनोहरपुर विधानसभा से लगातार 5 बार विधायक रहीं
जोबा मांझी लोकसभा सांसद हैं, उनका करियर प्रोफाइल इतना भर नहीं है। जोबा मांझी मनोहरपुर विधानसभा सीट से 1995 से 2024 तक लगातार 5 बार विधायक रहीं। वह पिछली हेमंत कैबिनेट में महिला, बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग की मंत्री भी थीं। 2024 में चाईबासा से सांसद चुनी गईं। 

चक्रधऱपुर में आम गृहिणी का जीवन जीती हैं जोबा
जोबा मांझी आज भी चक्रधऱपुर स्थित अपने घर में आम महिला की तरह रहती हैं। मानसून के समय खेतों में धान की रोपाई करने जाती हैं। मजदूरों के साथ बैठकर भोजन करती हैं। ठंड में मजदूरों के साथ खुद भी खेत में उतरकर धान काटती हैं और खलिहान में उसकी निराई-गुड़ाई भी करती हैं।

हां, सोशल मीडिया में आपको तस्वीर नहीं मिलेगी, क्योंकि जोबा मांझी को यह पसंद नहीं है। यही उनकी वास्तविक दिनचर्या है। 

गुदड़ी प्रखंड के लिहिर गांव का है पूरा वाकया

सखुआ के पत्तल पर भोजन करने का यह वाकया मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गुदड़ी प्रखंड के लिहिर गांव का है। जोबा मांझी, बेटे जगत मांझी संग यहां किसी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं। चूंकि, यह इलाका जंगल और पहाड़ियों से घिरा है तो कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आयोजकों ने ग्रामीणों सहित सांसद और विधायक के लिए जमीन पर ही पंगत में बैठकर भोजन करने की व्यवस्था की। बिना किसी झिझक के सांसद जोबा मांझी और जगत मांझी भी जमीन पर बैठ गए।

आयोजकों ने सखुआ के पत्तल में खाना परोस दिया। जब जोबा मांझी ने देखा कि ग्रामीण उन्हें जमीन पर बैठा देखकर असहज महसूस कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि वह आंदोलनकारी  के परिवार से आती हैं। 

गौरतलब है कि सांसद जोबा माझी के पति देवेंद्र माझी सारंडा-पोड़ाहाट जंगल में बसे लोगों को जल, जंगल और जमीन पर अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करते हुए शहीद हो गये थे। देवेंद्र माझी के विधायक रहते जोबा माझी चक्रधरपुर के इतवारी बाजार में सब्जी बेचा करती थी।

राजनीति के शिखर पर होने के बावजूद सांसद जोबा माझी आज भी खेतीबाड़ी का कार्य करती हैं और घर के कामकाज भी संभालती है।


 

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