द फॉलोअप डेस्क
दिल्ली स्थित झारखंड भवन में इन दिनों अव्यवस्था की स्थिति लगातार सामने आ रही है। यह भवन झारखंड के मंत्रियों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के दिल्ली प्रवास के दौरान ठहरने के लिए बनाया गया है, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं चरमराती नजर आ रही हैं। 16 अप्रैल को स्थिति और बिगड़ गई, जब केटरिंग स्टाफ ने अचानक हड़ताल कर दी। जानकारी के अनुसार उस दिन झारखंड सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, के एन तिपाठी, विधायक मंगल कालिंदी, रौशन लाल चौधरी, युवा आयोग के अध्यक्ष कुमार गौरव सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की झारखंड भवन में रूम की बुकिंग थी, लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें भोजन जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पाई।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कम वेतन में ज्यादा काम कराया जा रहा है, जिससे वे काफी परेशान हैं। उनका आरोप है कि जिस आउटसोर्सिंग कंपनी को केटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है, उसने पर्याप्त स्टाफ नहीं रखा है। इसके कारण मौजूद कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। साथ ही, कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मैनेजर का व्यवहार उनके साथ ठीक नहीं है और अक्सर अभद्रता की जाती है। इन समस्याओं से तंग आकर कर्मचारियों ने झारखंड भवन के मुख्य गेट पर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे वहां ठहरे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इसके अलावा एक और समस्या सामने आई है कि आउटसोर्सिंग कंपनी ने ज्यादातर कर्मचारियों को दूसरे राज्यों से रखा है। ऐसे में उन्हें झारखंड के जनप्रतिनिधियों की जानकारी नहीं होती, जिससे समन्वय में परेशानी होती है। खाने की खराब गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। कुछ महीने पहले पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी ने भी यहां ठहरने के दौरान भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था और स्वास्थ्य खराब होने की शिकायत की थी। उन्होंने इस संबंध में लिखित शिकायत भी दी थी, लेकिन इतने समय बाद भी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। ऐसे में झारखंड भवन में ठहरने वाले मेहमानों को अब भी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है और व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।
