साहिबगंज:
Sahibganj News: स्कूलों में पढ़ने वाली नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अलग-अलग जिलों में स्कूल परिसर, छात्रावास (Hostel) और शिक्षण संस्थानों (educational institutions) से जुड़े नाबालिगों (Minors) के साथ यौन अपराध के मामले सामने आने के बाद यह सवाल अहम हो जाता है कि आखिर स्कूलों में बेटियां कितनी सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। साहिबगंज जिले (Sahibganj District) के रांगा थाना क्षेत्र के दुगापुर स्थित सेंट जेवियर्स पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस ने मामले में स्कूल के नाइट गार्ड साहेबराम लोहरा और स्कूल के निदेशक जाफर शेख को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

तबीयत बिगड़ने के बाद सामने आया मामला
परिजनों के अनुसार, छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उसे चिकित्सक के पास ले जाया गया। जांच के दौरान उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद परिजनों को कथित घटना की जानकारी हुई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्कूल के नाइट गार्ड ने छात्रा के साथ कई बार दुष्कर्म किया और घटना के बारे में किसी को बताने पर उसे धमकी दी। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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स्कूल प्रबंधन पर भी लगाए गए आरोप
परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर घटना को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद स्कूल निदेशक ने परिवार को चुप रहने के लिए कहा था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। परिजनों की शिकायत पर 29 सितंबर को रांगा थाना में मामला दर्ज किया गया। थाना प्रभारी अखिलेश कुमार यादव के नेतृत्व में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। बरहरवा एसडीपीओ नितिन खंडेलवाल के अनुसार, मामले की जांच जारी है।
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आवासीय स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
बताया गया है कि संबंधित विद्यालय आवासीय है और छात्रा छात्रावास में रहती थी। ऐसे में छात्रावास और स्कूल परिसर में नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा, रात के समय निगरानी, कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन, प्रवेश-निकास की निगरानी और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। आवासीय स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि छात्र-छात्राएं लंबे समय तक परिसर में रहते हैं। ऐसे संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले सत्यापन और नियमित निगरानी की व्यवस्था प्रभावी होना जरूरी है।
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सवाल सिर्फ साहिबगंज का नहीं
यह मामला केवल एक स्कूल या एक जिले तक सीमित सवाल नहीं खड़ा करता। जब अलग-अलग स्थानों से स्कूलों और छात्रावासों में नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले सामने आते हैं, तो संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है। स्कूलों में कर्मचारियों का सत्यापन, छात्रावासों में निगरानी, सीसीटीवी व्यवस्था, छात्राओं के लिए सुरक्षित शिकायत तंत्र और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई जैसे पहलुओं को लेकर व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी समीक्षा की जरूरत है। बच्चियों को उनके माता-पिता शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद के साथ स्कूल भेजते हैं। ऐसे में स्कूल और छात्रावास उनके लिए सुरक्षित स्थान बने रहें, यह केवल संस्थान के प्रबंधन की नहीं, बल्कि संबंधित विभाग और पूरे प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी भी है।
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सरकार की जवाबदेही पर भी नजर
झारखंड में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है। ऐसे में साहिबगंज की घटना के बाद स्कूलों और आवासीय संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार स्कूलों और छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाती है। साथ ही, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी कैसे तय की जाती है, यह भी अहम होगा। सवाल सिर्फ साहिबगंज की एक छात्रा का नहीं है। सवाल उन सभी बेटियों की सुरक्षा का है, जिन्हें माता-पिता भरोसे के साथ स्कूल भेजते हैं। ऐसे में स्कूलों और छात्रावासों को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए नियमों का प्रभावी पालन और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।