द फॉलोअप डेस्क
रिम्स परिसर में 1208 करोड़ की लागत से दो भवनों का निर्माण होगा। एक भवन सुपरस्पेशलिटी भवन का एक्सटेंशन होगा जबकि दूसरा मदर एंड चाइल्ड हेल्थ यूनिट के तौर पर रहेगा। रविवार को रिम्स शासी परिषद की 55वीं बैठक में इसकी स्वीकृति दी गई। करीब साढ़े चार घंटे मैराथन बैठक में कई प्रस्ताव पर मुहर लगी। जिसमें दोनों भवनों को बनाने की भी स्वीकृति मिली। सुपरस्पेशलिटी के एक्टेंशन में मुख्य तौर पर न्यूरो साइंस सेंटर बनाया जाएगा। इसमें न्यूरो का करीब 450 बेड स्थापित होगा। वर्तमान व्यवस्था के तौर पर जल्द ही न्यूरो के मरीजों के लिए रिम्स में नेत्र रोग विभाग के 90 बेड का इस्तेमाल किया जाएगा। जबकि, क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को जल्द ही पूरा कर उसमें नेत्र रोग विभाग को शिफ्ट करने की स्वीकृति मिली। इसके अलावा डेंटल कॉलेज में ही ऑपरेशन थियेटर का भी निर्माण होगा।

अनुबंध पर कार्यरत 50 नर्सों की होगी नियुक्त
रिम्स में पहले से कार्यरत 50 अनुबंध नर्सों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें नियुक्त करने पर शासी परिषद ने सहमति दी है। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि जल्द ही इसके लिए इंटरव्यू का आयोजन होगा। रिम्स में नर्सों की संख्या को बढ़ाकर स्टॉफ नर्स की संख्या 2857, नर्सिंग सिस्टर की संख्या 137, सहायक नर्सिंग अधीक्षक 8, नर्सिंग अधीक्षक 2 और चीफ नर्सिंग अधीक्षक के एक पद होंगे। इसके साथ ही तीन अनुबंध पर कार्यरत एंबुलेंस ड्राइवरों के मानदेय को बढ़ाया गया। अब इन ड्राइवरों को 25000 रुपए मानदेय दिया जाएगा। वहीं, स्टोर क्रय, अस्पताल प्रबंधन, आईटी प्रबंधन के लिए अलग से 25 पदों पर शीघ्र ही नियुक्ति की जाएगी।

बैटरी ऑपरेटेड 10 सीटर चार वाहन खरीदे जाएंगे
अब रिम्स के डॉक्टर, स्टॉफ सभी पार्किंग में गाड़ी पार्क करेंगे। इसके बाद उन्हें उनके संबंधित स्थान तक रिम्स के वाहन से पहुंचाया जाएगा। जिसके लिए 10 सीटर चार बैटरी ऑपरेटेड वाहन खरीदे जाएंगे। इसके अलावा लिफ्ट की खरीदारी और उसका मेटेनेंस करने का भी निर्णय लिया गया। वर्तमान में रिम्स में कुल 44 लिफ्ट हैं। जिसमें से कई लिफ्ट पूरी तरह जर्जर हो गए हैं। ऐसे लिफ्ट को हटाया जाएगा। मेंटेनेंस के लिए अलग से लिफ्ट के संचालन के लिए अलग से टेंडर होगा।

हर दिन मरीजों को मिलेंगी अलग रंग की बेडशीट
रिम्स में अब मरीजों को हर दिन अलग-अलग रंग की बेडशीट दी जाएगी। इसके लिए जल्द ही बेडशीट और नए कंबल की खरीदारी भी होगी। इसके अलावा लांड्री के लिए जल्द ही नए सिरे से टेंडर निकाले जाने का भी निर्णय हुआ है। इसके लिए प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।

निजी क्षेत्र के लैब से नहीं ली जाएगी कोई सुविधा
रिम्स में अब निजी क्षेत्र के किसी भी रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी की सेवा नहीं ली जाएगी। बैठक में एक महीने में रिम्स के पैथोलॉजी विभाग को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया। माइक्रोबायोलॉजी, लैब मेडिसिन, सेंट्रल लैब में जल्द ही रिएजेंट और कंज्युमेबल अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का फैसला हुआ। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए प्रत्येक विभाग को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए सेवानिवृत कर्मियों की भी सेवाएं ली जाएंगी। इसके अलावा रेडियोलॉजी विभाग के लिए एक नई एक्सरे मशीन रीदने का भी निर्णय लिया गया। डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर खुफिया एजेंसी लगाने के निर्णय को भी जीबी की बैठक में निरस्त कर दिया गया। साथ ही निर्णय हुआ कि आयुष्मान के तहत मिलने वाली राशि का 25 फीसदीअब डॉक्टरों को दिया जाएगा।

सीएमसी वेल्लोर की तर्ज पर होगी इंटीग्रेटेड इंटरनेट की व्यवस्था
सीएमसी वेल्लोर की तर्ज पर रिम्स में भी इंटीग्रेटेड इंटरनेट की व्यवस्था लागू की जाएगी। कंट्रोल रूम का अधिष्ठापन होगा। यहीं से पूरे रिम्स की मॉनिटरिंग होगी। वहीं, रिम्स में टेलिफोनिक व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा कई अन्य निर्णय लिए गए। जिसमें अनुबंध पर कार्यरत कर्मियों को तीन महीने के अवधि विस्तार को अब एक साल बढ़ाने की बात कही गई। वहीं, निजी क्लिनिकों और साइन बोर्ड को रिम्स परिसर से पूरी तरह हटाने का भी फैसला हुआ।

हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://chat.whatsapp.com/EUEWO6nPYbgCd9cmfjHjxT