दीपक झा/जामताड़ा
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना के लाभुकों के सत्यापन को लेकर जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। योजना के तहत लाभुकों के भौतिक सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन अब तक हुई जांच में एक भी अयोग्य लाभुक नहीं मिलने से प्रशासनिक स्तर पर संदेह गहराने लगा है। नारायणपुर प्रखंड में योजना के लगभग 34 हजार लाभुक हैं। पंचायत स्तर पर इन सभी का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक विभिन्न पंचायतों में करीब 8500 लाभुकों का सत्यापन पूरा हो चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जांच में अब तक एक भी लाभुक अयोग्य नहीं पाया गया है।

कई कर्मियों को दी गई थी जिम्मेदारी
योजना के लाभुकों के सत्यापन की जिम्मेदारी पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सेविका, विद्यालय शिक्षक, सहिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दी गई है। इन सभी को घर-घर जाकर लाभुकों की स्थिति की जांच करनी है और यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। सरकार की मंशा है कि केवल पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ मिले, ताकि फर्जी या अपात्र लाभुकों को सूची से हटाया जा सके। लेकिन बड़ी संख्या में जांच होने के बावजूद एक भी अयोग्य लाभुक नहीं मिलने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

प्रभारी बीडीओ ने जताई गड़बड़ी की आशंका
नारायणपुर के प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता ने भी इस सत्यापन प्रक्रिया पर कड़ा संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लाभुकों की जांच के बावजूद एक भी व्यक्ति का अयोग्य न मिलना सामान्य बात नहीं है। बीडीओ ने खुलासा किया कि उन्हें लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ पंचायत सचिव पैसे लेकर लाभुकों को योग्य घोषित कर रहे हैं और सत्यापन प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि यह योजना गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए है, इसलिए किसी भी अपात्र को इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए।

अब खुद बीडीओ करेंगे दोबारा जांच
प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता ने घोषणा की है कि अब वे स्वयं अपने स्तर से पूरे मामले की जांच करेंगे। जिन लाभुकों का अब तक सत्यापन हो चुका है, उनकी दोबारा जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या रिश्वतखोरी सामने आती है, तो संबंधित कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब पूरी सत्यापन प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। स्थानीय लोग भी अब प्रशासन की अगली कार्रवाई और निष्पक्ष जांच के इंतजार में हैं।