द फॉलोअप डेस्क
दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार, 10 सितंबर, 2026 को कथित IRCTC घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव और छह अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में CBI के मामले में RJD प्रमुख और 11 अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे। गुरुवार को स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा कि सात लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का "मजबूत संदेह" है और जांच का तरीका, समय और प्रक्रिया राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित नहीं लगती, जैसा कि आरोपियों के वकीलों ने तर्क दिया था। CBI की FIR में आरोप लगाया गया था कि UPA-I सरकार में रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने 2004 में दो IRCTC होटलों के रखरखाव का काम एक कंपनी को सौंप दिया था। इसके बदले में उन्हें पटना में एक कीमती ज़मीन रिश्वत के तौर पर मिली थी। यह ज़मीन सरला गुप्ता की 'बेनामी' कंपनी के ज़रिए ली गई थी; सरला गुप्ता पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी थीं।

PMLA के तहत आपराधिक मामला दर्ज हुआ था
ED ने CBI की इसी FIR के आधार पर प्रसाद के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ PMLA के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। अधिकारियों के अनुसार, ED ने आरोपियों द्वारा कथित तौर पर शेल कंपनियों के ज़रिए कमाए गए "अपराध से प्राप्त धन" (proceeds of crime) की जांच की थी। CBI की FIR में नामजद अन्य लोगों में विजय कोचर, विनय कोचर (दोनों सुजाता होटल्स के डायरेक्टर), डिलाइट मार्केटिंग कंपनी (जिसे अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता है) और तत्कालीन IRCTC मैनेजिंग डायरेक्टर पी.के. गोयल शामिल हैं। CBI की FIR 5 जुलाई, 2018 को दर्ज की गई थी। यह मामला रांची और पुरी में होटलों के रखरखाव का कॉन्ट्रैक्ट सुजाता होटल्स को देने और इसके बदले में प्रीमियम ज़मीन लेने से जुड़ा था।
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