द फॉलोअप डेस्क
जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में अनियमितता से जुड़े मामलों में मास्टरमाइंड अभय तिवारी को लेकर रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। सीआईडी ने कोर्ट में सौंपी गई केस डायरी में अभय तिवारी को मास्टरमाइंड बताते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी है। जांच एजेंसी के मुताबिक, जेपीएससी की दो परीक्षाओं में तकरीबन 500 ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई। वहीं, जेएसएससी सीजीएल मामले में सीआईडी की एसआईटी ने गुरुवार को 25 सफल अभ्यर्थियों को बुलाकर उनसे पूछताछ की।

साले के नाम पर था TDPL कार्यालय का लीज एग्रीमेंट
सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने टीडीपीएल के लिए फ्लैट दिलाने में मदद की थी। लालपुर स्थित फ्लैट की मालिकन रेखा देवी ने सीआईडी को दिए बयान में बताया कि टीडीपीएल के कार्यालय के लिए लीज एग्रीमेंट अभय तिवारी के साले सौरभ पांडेय के नाम पर किया गया था। इसी फ्लैट से टीडीपीएल के ऑपरेशन संचालित होते थे। सीआईडी ने इसी फ्लैट से अभय तिवारी के टीडीपीएल कर्मी होने का आई कार्ड भी बरामद किया था। इसके अलावा टीडीपीएल के निदेशकों के रांची दौरे का खर्च भी अभय तिवारी ने उठाया था और होटल के बिल का भुगतान यूपीआई के जरिए किया गया था।

नॉमिनेशन से काम दिलाने में भी अभय की भूमिका
सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि टीडीपीएल को नॉमिनेशन के आधार पर काम दिलाने में भी अभय तिवारी की पूरी भूमिका थी। जांच एजेंसी ने यूपीआई पेमेंट और लीज एग्रीमेंट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है। कोर्ट में यह भी बताया गया कि जेपीएससी 2025 पीटी परीक्षा के लिए बुद्धेश्वर उरांव ने 24 कैंडिडेट जुटाए थे, जिनमें से 11 अभ्यर्थियों ने 10-10 लाख रुपये दिए थे। सीआईडी के अनुसार, यह पैसे भी अभय तिवारी तक पहुंचाए गए थे। धर्मेंद्र कुमार के बैंक खातों की पड़ताल में सामने आए तथ्यों के साथ टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और अभय तिवारी के बयानों में सामने आए तथ्यों की जानकारी भी कोर्ट को दी गई है।