द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सीआईडी को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीसीटीवी फुटेज और ओएमआर शीट की जांच से कई अहम साक्ष्य मिले हैं। जांच के अनुसार, 14वीं जेपीएससी परीक्षा में सफल अभ्यर्थी ओम प्रकाश राणा के परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी फुटेज में वह कथित तौर पर सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए। इसके बावजूद उनके दोनों पेपर की ओएमआर शीट में क्रमशः 91 और 92 उत्तर सही पाए गए। इसी तरह, वंदना कुमारी के फुटेज के विश्लेषण में उनके दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न हल करते दिखने की बात सामने आई, जबकि उनकी ओएमआर शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज मिले। जांच में इन अंतर को संदिग्ध माना गया है।

खाली ओएमआर पर 292 अंक और कार्बन कॉपी में अंतर
सीआईडी की जांच में अरविंद कुमार का मामला भी सामने आया है। जांच के मुताबिक, उनकी ओएमआर शीट में कोई गोला भरा हुआ नहीं था, फिर भी उन्हें 292 अंक दिए गए। बाद में उन्होंने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने ओएमआर शीट खाली छोड़ी थी और उसकी कार्बन कॉपी जला दी थी। वहीं, टीडीपीएल के कर्मचारी रक्षक सिंह की कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर दर्ज थे, जबकि मूल ओएमआर शीट में 147 उत्तर पाए गए। जांच में उनके मोबाइल में मौजूद वीडियो का भी उल्लेख है, जिसमें मूल प्रति कथित तौर पर स्ट्रांग रूम के बाहर टीडीपीएल कर्मियों के पास दिखाई देती है। इन तथ्यों के आधार पर ओएमआर शीट की सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं।

अभय तिवारी और एजेंट के नेटवर्क की जांच
जांच में अभय तिवारी को कथित मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित किया गया है। सीआईडी के अनुसार, वह सहायक वन संरक्षक (ACF), वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की परीक्षाओं में सफल हुआ था। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि उसकी पत्नी, भाई और साला कथित सेटिंग के जरिए 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए। एजेंट बुदेश्वर भगत के संबंध में जांच एजेंसी ने बताया कि उसके जरिए 11 अभ्यर्थी 14वीं पीटी में सफल हुए। उसके लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की सूची मिलने की बात भी सामने आई है, जो कथित तौर पर परिणाम जारी होने से करीब दो महीने पहले तैयार थी। उस समय ओएमआर शीट टीडीपीएल एजेंसी के पास थीं। इन तथ्यों के आधार पर जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप की आशंका की पड़ताल कर रही है।

कॉल डिटेल और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा पर सवाल
सीआईडी जांच में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल ख्यांग्ते और आरोपियों के बीच संपर्क को लेकर भी अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच के अनुसार, ख्यांग्ते ने आरोपी धर्मेंद्र कुमार से सैकड़ों बार बातचीत की। परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से 304 बार फोन पर संपर्क, सह-अभियुक्त सोनू कुमार से 139 बार, अभय तिवारी से 12 बार और उमेश कुमार से दो बार संपर्क की बात सामने आई है। हालांकि, कॉल की संख्या अपने आप में किसी की संलिप्तता साबित नहीं करती। जांच में यह भी सामने आया कि ओएमआर स्कैनिंग के दौरान कॉपियां कथित तौर पर बिना अधिकृत अनुमति करीब दो महीने तक एजेंसी के पास रखी गईं, जिसे चेन ऑफ कस्टडी के नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। स्ट्रांग रूम और ओएमआर व उत्तर पुस्तिकाओं की निगरानी अध्यक्ष तथा परीक्षा नियंत्रक के निर्देशन में थी। आरोप है कि इस दौरान वहां लगे सीसीटीवी कैमरे बंद रखे जाते थे। इन सभी बिंदुओं के आधार पर सीआईडी परीक्षा अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।