द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) में जेपीएससी (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त मुख्य परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग से जुड़ा मामला एक बार फिर उठा। सोमवार को चीफ जस्टिस (Chief Justice) एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ में उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई हुई, जिसमें एकल पीठ ने परीक्षा परिणाम रद्द करने की मांग खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं ने राज्य सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने से संबंधित मामले को भी इसी अपील के साथ सुनने का आग्रह किया।

हस्तक्षेप याचिका खारिज, एकल पीठ में आदेश सुरक्षित
अपीलकर्ताओं की मांग पर खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने से संबंधित मामले में एकल पीठ सुनवाई पूरी कर चुकी है और अपना आदेश सुरक्षित रख चुकी है। ऐसी स्थिति में इस मामले में दाखिल हस्तक्षेप याचिका (आईए) पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इसके बाद अदालत ने हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी। गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने अयूब तिर्की और राजेश कुमार की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने समय रहते अपनी आपत्तियां नहीं उठाईं और मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसी कोई खामी सामने नहीं आई, जिसके आधार पर परिणाम रद्द किया जा सके।

डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षकों के अनुभव पर उठे थे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में जेपीएससी की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन परीक्षा नियमों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं की कॉपियों की जांच कम अनुभव वाले परीक्षकों से कराए जाने का भी दावा किया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मूल्यांकन करने वाले परीक्षकों के पास कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए था। वहीं, जेपीएससी ने इन आरोपों के जवाब में कहा था कि सभी अभ्यर्थियों के लिए समान नियम लागू किए गए और मूल्यांकन में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ। आयोग का तर्क था कि परीक्षा पद्धति पर आपत्ति थी, तो अभ्यर्थियों को परिणाम जारी होने से पहले ही इसे उठाना चाहिए था।