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धनबाद में जेएमएम का स्थापना दिवस : सीएम हेमंत सोरेन बोले- केंद्र का सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं, अधिकार के लिए लड़ाई तय

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धनबाद
कोयला नगरी धनबाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्थापना दिवस पूरे जोश और राजनीतिक संदेशों के साथ मनाया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि जैसे झारखंड लड़कर लिया गया, वैसे ही राज्य के हक-अधिकार के लिए भी हर मोर्चे पर संघर्ष किया जाएगा।
सीएम ने कहा कि धनबाद कोयले के कारण दुनिया में अलग पहचान रखता है, लेकिन यहां की सार्वजनिक कंपनियों में आउटसोर्सिंग के जरिए निजी कंपनियों को घुसाकर बाहर से मजदूर लाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं दिया जा रहा, क्योंकि कंपनियों को डर है कि लोकल लोगों को रखने से आंदोलन होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देना ही होगा, नहीं तो अपना हक-अधिकार लेकर रहेंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी मेहनत और बलिदान के बाद झारखंड राज्य मिला है, इसलिए झारखंड विरोधी ताकतों को दोबारा खड़ा होने का मौका नहीं देना है। गांव और शहर के बीच किसी तरह का भेद नहीं होना चाहिए, क्योंकि गांव भी हमारा है और शहर भी हमारा।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य को पटरी पर लाने का प्रयास किया है, लेकिन केंद्र में बैठी सरकार झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इसके बावजूद झारखंड चुप नहीं बैठेगा। अधिकार के लिए राजनीतिक लड़ाई भी होगी और जरूरत पड़ी तो कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।
सीएम सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड को जानबूझकर गरीब और कमजोर बनाया गया, ताकि दूसरे राज्यों का विकास किया जा सके। वहां इमारतें और सड़कें बनें, इसके लिए मजदूर झारखंड से भेजे गए। उन्होंने कहा कि अगर नीति-निर्धारकों का नजरिया झारखंड के प्रति सही होता, तो यह राज्य देश में अग्रणी राज्यों में होता।


उन्होंने कहा कि झारखंड के लोगों को लंबे समय तक गरीबी, यातनाएं और अशिक्षा झेलनी पड़ीं। यही वजह थी कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अलग राज्य का बिगुल फूंका। अनगिनत बलिदानों के बाद झारखंड अस्तित्व में आया, लेकिन वर्षों तक झारखंड विरोधी ताकतें सत्ता में रहीं और राज्य को कमजोर किया गया।
मुख्यमंत्री ने धनबाद की क्रांतिकारी धरती को नमन करते हुए कहा कि यह वह भूमि है, जहां से आदिवासी-मूलवासी, किसान और मजदूरों को नेतृत्व मिला। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष और बलिदान ने झारखंड को अलग पहचान दी। सीएम ने दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज का दिन राज्य को संवारने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि झारखंड को मजबूत, आत्मनिर्भर और न्यायपूर्ण राज्य बनाने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ें।

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