जमशेदपुर
लौहनगरी की सड़कों पर वर्षों से पसरा ट्रैफिक का दबाव अब एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। दरअसल, जमशेदपुर में झारखंड का पहला और सबसे लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। ऐसे में शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली नेशनल हाइवे-33 (अब NH-18) पर पारडीह काली मंदिर से लेकर मानगो-डिमना-बालीगुमा तक रोज दिखने वाला ट्रैफिक जाम अपने अंत की ओर बढ़ता दिख रहा है। वर्षों से शहर की रफ्तार को थामे इस दबाव को तोड़ने के लिए जिस मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर का इंतजार था, वह अब जमीन पर आकार ले रहा है और ये परियोजना अगर तय समय में पूरा हुआ, तो शहरवासियों को न सिर्फ जाम से राहत मिलेगी। बल्कि, ये जमशेदपुर के ट्रैफिक इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट भी साबित होगा। यानी, आने वाले वर्षों में शहर का ट्रैफिक मैप पूरी तरह बदलने वाला है। यह फोरलेन एलिवेटेड कॉरिडोर सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूरी तरह जमशेदपुर के ट्रैफिक सिस्टम का रीसेट बटन है, जिसके तहत शहर के यातायात को नये सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है। जहां शहर के भीतर के दबाव को कम करने के लिए ट्रैफिक को NH के ऊपर शिफ्ट किया जा रहा है। यानि, नीचे शहर की लोकल ट्रैफिक और ऊपर लंबी दूरी के वाहन एक साथ रफ्तार पकड़ेंगी।
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फोरलेन एलिवेटेड कॉरिडोर पर लगभग 936.26 करोड़ की राशि खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है, हालांकि निर्माण एजेंसी का दावा है कि इसे तय समय से पहले भी पूरा किया जा सकता है। इसके पूरा होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यात्रा के समय पर दिखेगा। जो सफर आज 40 से 45 मिनट लेता है, वह घटकर कुछ ही मिनटों में सिमट सकता है। इसके साथ ही जमशेदपुर से घाटशिला, बहरागोड़ा, कोलकाता और ओडिशा की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी भी और सुगम हो जायेगी। इससे औद्योगिक परिवहन को भी सीधा लाभ मिलेगा। यानी, शहर के बीच से गुजरी सबसे व्यस्त एनएच-18 स्ट्रेच को जाम मुक्त करने के उद्देश्य से इसे तैयार किया जा रहा है।

एलिवेटेड कॉरिडोर के 70 से अधिक स्थानों पर पाइलिंग के साथ पिलर तक खड़े हो चुके है। साथ ही कई पिलरों पर गार्डर चढ़ने का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। यह एलिवेटेड कॉरिडोर पारडीह काली मंदिर से शुरू होकर मानगो और डिमना के सबसे भीड़भाड़ वाले हिस्सों के ऊपर से गुजरते हुए सीधे बालीगुमा तक जायेगा। इस बड़े बदलाव से मानगो, डिमना और बालीगुमा में रोज लगने वाले जाम में भारी कमी आने की उम्मीद है। यह सिर्फ एक फ्लाईओवर नहीं, बल्कि जमशेदपुर के ट्रैफिक को दो स्तरों में बांटने की रणनीतिक कोशिश है। इस परियोजना में 30 छोटी-बड़ी पुल-पुलिया, सर्विस लेन और सहायक संरचनाएं भी शामिल हैं, जो इसे एक समग्र ट्रैफिक समाधान बनाता हैं।
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