JSSC Mahila Supervisor: झारखंड महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति परीक्षा ((Jharkhand Mahila Supervisor Recruitment) में सफल 33 अभ्यर्थियों की स्नातक डिग्री (Graduation Degree) की जांच में गड़बड़ियां सामने आई हैं। विभागीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को वापस लौटा दी है। आयोग से मामले में आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। सभी 33 अभ्यर्थियों ने राज्य के एक निजी विश्वविद्यालय (University) से स्नातक की पढ़ाई की है। विभाग की ओर से गठित जांच कमेटी ने इनकी डिग्रियों को संदेहास्पद बताया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को भी पत्र लिखा है।

जांच में सामने आईं चार बड़ी गड़बड़ियां
जांच के दौरान अभ्यर्थियों की डिग्री और शैक्षणिक रिकॉर्ड में कई विसंगतियां मिली हैं। विश्वविद्यालय को 33 अभ्यर्थियों की फीस रसीद, दैनिक उपस्थिति और आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में परेशानी हुई। वहीं, उपस्थिति शीट में उत्तर पुस्तिकाओं के सीरियल नंबर पर ओवरराइटिंग भी पाई गई। इसके अलावा, अधिकांश डिग्रियों पर जारी करने की तारीख 15 मई 2025 दर्ज है, जबकि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह 9 मार्च 2025 को हुआ था। कुछ प्रोविजनल प्रमाण-पत्रों में भी अंतिम डिग्री के बाद जारी होने का उल्लेख है। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित अभ्यर्थियों के 12वीं पास करने और स्नातक में नामांकन लेने के बीच छह से 13 वर्ष का अंतर है।

2023 में शुरू हुई थी भर्ती, 28 अभ्यर्थियों का मामला कोर्ट में
झारखंड महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा 2023 के लिए JSSC ने वर्ष 2023 में आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके बाद सितंबर 2024 में परीक्षा आयोजित हुई और 27 मई 2025 को परिणाम जारी किया गया। रिजल्ट के बाद आयोग ने सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग से की थी। जानकारी के अनुसार, विभाग ने 444 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए अधियाचना JSSC को भेजी थी। परीक्षा में कुल 313 उम्मीदवार सफल हुए थे, जबकि 131 पद रिक्त रह गए थे। अब 33 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा वापस लौटा दी गई है, जबकि 28 अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में आगे की कार्रवाई के लिए JSSC के निर्णय और विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई पर नजर रहेगी।