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छात्रों को फंसाने के आरोपों पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, JUT-AICTE की भूमिका की CBI जांच के आदेश

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रांची

झारखंड हाईकोर्ट ने छात्रों को कथित रूप से फंसाने से जुड़े मामले को गंभीर मानते हुए Jharkhand University of Technology (JUT) और All India Council for Technical Education (AICTE) की भूमिका की जांच का आदेश दिया है। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया है कि वह पूरे मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करे।
न्यायाधीश राजेश कुमार ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (DIT) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 फरवरी की तारीख तय की है।


याचिका में कहा गया था कि AICTE ने 30 अप्रैल 2025 को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नामांकन की अनुमति दी थी, जिसके बाद कॉलेज में छात्रों ने दाखिला लिया। इसके बावजूद JUT छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दे रहा है, जिससे उनका भविष्य संकट में पड़ गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने JUT के रजिस्ट्रार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। रजिस्ट्रार की मौजूदगी में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह स्थिति ट्रैफिक पुलिस द्वारा “नो एंट्री” या “नो पार्किंग” बोर्ड हटाकर अवैध वसूली करने जैसी प्रतीत होती है। पहली नजर में अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताया।


हाईकोर्ट ने कहा कि जब AICTE की अनुमति के बाद छात्रों ने नामांकन लिया, तो उन्हें परीक्षा से वंचित करना राज्य के अधिकारियों द्वारा छात्रों का भविष्य बर्बाद करने जैसा है। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला मानते हुए CBI को चौथा प्रतिवादी बनाया और नोटिस जारी किया। CBI की ओर से ASGI प्रशांत पल्लव ने नोटिस प्राप्त किया।
अदालत ने CBI को निर्देश दिया है कि वह यह जांच करे कि AICTE और JUT द्वारा छात्रों को किस तरह फंसाया गया, इसमें किसकी क्या भूमिका रही और क्या इसमें अनियमितता या मिलीभगत है। साथ ही कोर्ट ने AICTE और JUT को CBI जांच में पूरा सहयोग करने का भी आदेश दिया है।

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