द फॉलोअप डेस्क
रांची कोषागार ने वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में अनियंत्रित खर्च पर रोक लगाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। नए निर्देशों के तहत अब सभी विभाग मार्च महीने में अपने वार्षिक बजट का अधिकतम 15 प्रतिशत ही खर्च कर सकेंगे। इससे अधिक राशि निकालने के लिए वित्त विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।
चालू वित्तीय वर्ष का कुल बजट करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से अब तक लगभग 70 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई है। ऐसे में शेष 30 प्रतिशत राशि को एक ही महीने में खर्च करना संभव नहीं माना जा रहा। कोषागार ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और मार्च में होने वाली ‘बजट की दौड़’ को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

निर्देश में कहा गया है कि अप्रैल से सितंबर तक बजट की 50 प्रतिशत राशि खर्च करने का प्रावधान है, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि अक्टूबर से मार्च के बीच उपयोग की जानी चाहिए। लेकिन कई विभाग अंतिम समय में बजट समाप्त करने के लिए तेजी से निकासी करते हैं, जिससे वित्तीय असंतुलन की स्थिति बनती है। कोषागार ने सभी जिला स्तरीय पदाधिकारियों और विभागों को निर्देश का सख्ती से पालन करने को कहा है। विशेष रूप से कृषि, ऊर्जा, पथ निर्माण, ग्रामीण विकास, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कल्याण और नगर विकास विभाग ने 31 जनवरी तक 50 प्रतिशत से भी कम बजट खर्च किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट खर्च करने की मौजूदा प्रक्रिया में खामियां हैं। कई बार जरूरत से ज्यादा राशि का प्रावधान कर दिया जाता है, जिससे वित्तीय वर्ष के अंत में जल्दबाजी में खर्च किया जाता है। ऐसे में पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करना जरूरी है। सरकार के इस फैसले से मार्च में होने वाले अनावश्यक और जल्दबाजी में किए जाने वाले खर्च पर लगाम लगने की उम्मीद है।