द फॉलोअप डेस्क
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ झारखंड छात्र संघ के सदस्यों ने तख्ती लेकर रांची डीसी सहित राज्य के अन्य जिलों के डीसी के नाम मांग पत्र जारी कर सुधार एवं कार्रवाई की मांग किया। झारखंड छात्र संघ के केन्द्रीय अध्यक्ष एस अली ने कहा कि रांची सहित राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल द्वारा आरटीई एक्ट 2009 की धारा 13 (1) (2) एवं झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम 2017 का खुलेआम उल्लंघन कर ऐनुअल फी, री-एडमिशन फी, डेवलपमेंट फी एवं अन्य विविधी शुल्क मनमानी तरीके से लिया जा रहा जो कही से भी न्यायउचित नही है, वहीं एनसीआरटी कि किताबों का संचालन करने के बजाए नीजि प्रकाशकों कि मंहगी किताबें संचालित किया जा रहा है और खास दुकानदारों से लेने का निर्देश दिया जाता है, यही स्थिति छात्रों के ड्रेस व अन्य खरीदारी में भी है। नीजि स्कूलों की इस मनमानी और तानाशाही के चलते अभिभावक हतास एवं निराश है। वो बच्चों के भविष्य के डर से बोल नही पाते जिसका फायदा लगातार निजी विद्यालयों द्वारा उठाया जा रहा है।
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निजी स्कूलों द्वारा स्कूल शुल्क कमिटी और पीटीए में करीबी या मैनेज लोगों को रखा जाता जिनके सहयोग से स्कूल के विभिन्न मदों में हर वर्ष 15-30 प्रतिशत फीस में बढ़ोतरी और किताबें बदल दी जाती है जो आरटीई एवं जैट एक्ट और रूल का खुल उल्लंघन है। इस दौरान उपस्थित लोगों ने डीसी से मांग किया कि निजी स्कूलों को लिखित में स्पष्ट निर्देश दे कि ऐनुअल फी, री-एडमिशन फी, डेवलपमेंट फी नही लिया जाए और एससीईआरटी की किताबों का संचालन किया जाए साथ ही जरूरत अनुसार निजी प्रकाशनों की किताबें दी जाए जिसे हर साल बदला नही जाए, स्कूलों की मनमानी पर रोक और कार्रवाई हेतू हेल्पलाइन नम्बर के साथ नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाए। इस मौके पर झारखंड छात्र संघ के महासचिव रंजीत उरांव, अमर कुमार, इमरान अंसारी, मोहसिन हव्वारी, मो मेराजउद्दी, सुहैब अख्तर, अबुल कलाम, शिव कुमार, आकिल अख्तर, मुनअमुल हसन सहित अन्य शामिल थे।
