द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया की स्थिति गंभीर बनी हुई है। एनएफएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 68 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से प्रभावित हैं, जिनके शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम/डीएल से कम पाया गया है। इनमें 31.9 प्रतिशत बच्चों का स्तर 10 से 11 ग्राम, 34.3 प्रतिशत का 7 से 10 ग्राम, जबकि 1.2 प्रतिशत बच्चों में यह स्तर 7 ग्राम/डीएल से भी कम दर्ज किया गया है।

आईएफए अभियान में लक्ष्य से पीछे राज्य
एनीमिया नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत आईएफए (आयरन और फोलिक एसिड) सप्लिमेंटेशन की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई है। स्कोर कार्ड रिपोर्ट के अनुसार जून से दिसंबर के बीच छह माह से पांच वर्ष तक के केवल 63% बच्चों, 5 से 9 वर्ष के 67.5% बच्चों, 10 से 19 वर्ष के 83.5% किशोरों, 98% गर्भवती महिलाओं और 65.2% धातृ महिलाओं को ही आईएफए की खुराक दी जा सकी।

बार-बार लक्ष्य से पीछे, आंकड़ों में भी गड़बड़ी के आरोप
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के दिसंबर तक भी कई समूहों में लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इसमें 5 वर्ष तक के 66%, 5 से 9 वर्ष के 70%, 10 से 19 वर्ष के 86% किशोरों, 99% गर्भवती और 69% धातृ महिलाओं तक ही आईएफए पहुंच पाया। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआती तिमाही और 2024-25 के अंतिम चरण में भी प्रदर्शन कमजोर रहा था। आरोप यह भी है कि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा उपलब्धि के आंकड़ों को बढ़ाकर 100 प्रतिशत से अधिक दिखाया गया, जिससे कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।