जामताड़ा
जामताड़ा सदर अस्पताल के एजिलस लैब में कामकाज पूरी तरह से ठप है. ऐसे में लैब संचालकों ने सामान समेटना शुरू कर दिया है. अब अस्पताल आने वाले कई गरीब मरीजों को संकट का सामना करना पड़ रहा है. जो जांचें पहले महज राशन कार्ड या आधार कार्ड दिखाने से हो जाती थी अब उनके लिए मरीजों को निजी केंद्रों पर भारी रकम चुकानी पड़ रही है.
1 करोड़ का बकाया राशि नहीं मिलने से रोकनी पड़ी सेवा
लैब बंद होने का मुख्य कारण सरकार और लैब संचालक के बीच अनुबंध का समाप्त होना और बकाया राशि का भुगतान न होना है. लैब के एसएसओ चंचल प्रमाणिक के अनुसार, 10 साल का एग्रीमेंट साल 2025 में ही पूरा हो गया था. इसके बाद एक साल का एक्सटेंशन तो मिला, लेकिन इस दौरान एक करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया गया. राशि लंबित होने और अनुबंध का नवीनीकरण न होने के कारण सेवाओं को रोकना पड़ा.
मुफ्त में होते थे कई जांच
एजिलस लैब में सीबीसी (CBC), लिवर फंक्शन टेस्ट, थायराइड और किडनी प्रोफाइल जैसी जटिल जांचें मुफ्त होती थीं. अब इन जांचों के लिए मरीजों को निजी लैब में 1500 से 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. दूर-दराज के गांवों से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना मुश्किल हो रहा है, जिसका सीधा असर उनके इलाज पर पड़ रहा है.
अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग बढ़ा बोझ
निजी लैब बंद होने से सदर अस्पताल के अपने पैथोलॉजी विभाग पर बोझ बढ़ गया है. जहां पहले रोजाना औसतन 35-45 मरीज आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 60 के पार पहुंच गई है. वर्तमान में यहां केवल 5 कर्मी तैनात हैं, जबकि बढ़ते लोड को देखते हुए कम से कम 5 अतिरिक्त पैथोलॉजिस्ट की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

अस्पताल की पैथोलॉजी लैब बनेगा आधुनिक
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने अपनी लैब को ही सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है. अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. दिनेश प्रसाद ने बताया कि पीपीपी मोड के बजाय अब अस्पताल की पैथोलॉजी लैब को आधुनिक बनाया जाएगा. इसके लिए मशीनों और संसाधनों की खरीद हेतु प्रस्ताव सिविल सर्जन कार्यालय को भेज दिया गया है ताकि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था बहाल की जा सके.