द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिले से धान अधिप्राप्ति योजना में एक बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां की 'रानी सती राइस मील' पर करोड़ों रुपये के गबन का गंभीर आरोप लगा है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, यह मामला वर्ष 2012-13 की धान अधिप्राप्ति योजना से जुड़ा है, जिसमें मील को कुल ₹1,64,19,743 आवंटित किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इतने सालों में मील द्वारा महज ₹27,00,000 ही सरकारी खाते में जमा किए गए हैं। नतीजतन, ₹1,37,19,743 की एक बड़ी रकम आज भी बकाया है। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त कार्यालय (जिला आपूर्ति शाखा) के अनुसार, रानी सती राइस मील को सरकार को कस्टम मिल्ड राइस (CMR) लौटाना था, जिसके एवज में पूरी राशि का समायोजन होना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। झारखंड राज्य खाद्य निगम, दुमका के जिला प्रबंधक द्वारा जनवरी 2026 में भेजे गए एक पत्र के बाद यह पूरा खेल उजागर हुआ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने अंचल अधिकारी (CO) को त्वरित जांच का जिम्मा सौंपा है। प्रशासन ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है जिनमें क्या रानी सती राइस मील वर्तमान में चालू है या बंद हो चुकी है, मील के प्रोपराइटर (मालिक) का सही नाम और पूरा पता क्या है और पूरे मामले की विस्तृत और बिंदुवार रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपी जाए। इस खुलासे ने सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और ऑडिट व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक दशक से भी ज्यादा समय तक इतनी बड़ी सरकारी राशि की वसूली क्यों नहीं की गई? क्या इसमें अधिकारियों की भी मिलीभगत थी? प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और पाई-पाई वसूली जाएगी।
