जामताड़ा:
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सख्त रोक के बावजूद जामताड़ा जिले में अवैध बालू का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। खनन विभाग की कथित चुप्पी के बीच बालू माफिया दिनदहाड़े नदियों से ट्रैक्टरों के जरिए बालू का अवैध उठाव और परिवहन कर रहे हैं। ताजा मामला जामताड़ा विधानसभा को नाला विधानसभा से जोड़ने वाले बाईपास मार्ग पर स्थित हाथधारा पुल का है। बिंद्रापाथर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हाथधारा नदी पर बने इस पुल के पिलर के ठीक नीचे से कथित तौर पर अवैध खनन किया जा रहा है। पिलर के पास से लगातार बालू निकाले जाने के कारण पुल की संरचनात्मक मजबूती पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

अस्पताल पहुंचने का मुख्य शॉर्टकट मार्ग संकट में
यह पुल नाला विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जामताड़ा सदर अस्पताल आने-जाने वाले मरीज और उनके परिजन इसी पुल के जरिए शॉर्टकट मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी यात्रा की दूरी काफी कम हो जाती है। यदि पुल क्षतिग्रस्त होता है, तो आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, हादसे की आशंका
पुल के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर आसपास के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पिलर के पास से इसी तरह बालू का उठाव जारी रहा, तो किसी भी दिन पिलर धंस सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।
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अतीत से सबक लेने में नाकाम प्रशासन
उल्लेखनीय है कि अवैध बालू उत्खनन के दुष्परिणाम का यह कोई पहला मामला नहीं है। करीब 9 साल पहले बने जामताड़ा-धनबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-499) पर बराकर नदी का बैजड़ा घाट पुल 19 अगस्त 2026 को अवैध बालू निकासी के कारण ध्वस्त हो गया था। पुल के ध्वस्त होने से धनबाद, जामताड़ा, दुमका और साहिबगंज के बीच आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बैजड़ा घाट की घटना से सबक लेने के बजाय हाथधारा पुल के नीचे कथित तौर पर जारी अवैध बालू खनन पर प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।