द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिले में प्रशासन ने बाल विवाह को रुकवाया. नारायणपुर प्रखंड के बोरवा गांव में मंगलवार को प्रशासन ने होने वाले एक प्रस्तावित निकाह को पहुंचकर रुकवा दिया. इस क्रर्र्वाई से पूरे क्षेत्र में बाल विवाह के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी गया है. मामले की शुरुआत तब हुई जब उपायुक्त कार्यालय को एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई। आवेदन में बताया गया था कि बोरवा गांव निवासी जमशेद अंसारी अपनी नाबालिग पुत्री का निकाह करवा रहे हैं.
उपायुक्त ने मामले की गंभीरताको देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद नारायणपुर बीडीओ देवराज गुप्ता के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. इस टीम में पंचायत सचिव अमरेंद्र झा और महिला पर्यवेक्षिका नियोति दास विशेष रूप से शामिल थीं. जब प्रशासनिक टीम बोरवा गांव पहुंची, तो वहां निकाह की तैयारियां अंतिम चरण में थीं. टीम ने तुरंत हस्तक्षेप किया और लड़की के परिजनों व उपस्थित ग्रामीणों से बातचीत की. अधिकारियों ने मौके पर ही प्रमाण पत्रों की जांच की, जिससे पुष्टि हुई कि लड़की अभी विवाह की वैधानिक आयु तक नहीं पहुंची है.
परिजनों को बताया गया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. अधिकारियों ने कम उम्र में विवाह से होने वाले शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के खतरों के बारे में विस्तार से समझाया. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि विवाह संपन्न होता है, तो न केवल माता-पिता, बल्कि निकाह कराने वाले और मेहमानों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की और निकाह को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया. ग्रामीणों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया और भविष्य में ऐसे आयोजनों में शामिल न होने की शपथ ली.
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