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जमशेदपुर में रामनवमी पर हाई अलर्ट, अभेद किले में तब्दील हुआ शहर, 2000 जवान, ड्रोन और 340 कैमरों की जद में लौहनगरी

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द फॉलोअप डेस्क
प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव को लेकर पूरी लौहनगरी भगवा ध्वज से सजी है। ऐसे में रामनवमी पर जमशेदपुर न सिर्फ राममय होगा, बल्कि सुरक्षा के अभेद घेरे में भी रहेगा, जहां हर हलचल दर्ज होगी और हर आशंका पर पहरा होगा। इस दौरान शहर की सड़कों से लेकर घाटों तक और जमीन से लेकर आसमान तक, यानी हर गतिविधि पर प्रशासन की पैनी नजर होगी, ताकि आस्था का यह उत्सव पूरी गरिमा और शांति के साथ संपन्न हो सके। खास बात यह है कि जहां देश के अधिकांश हिस्सों में रामनवमी का झंडा विसर्जन नवमी को होता है, वहीं जमशेदपुर में दशमी को यह परंपरा निभाई जाती है, दशकों से चली आ रही यह परंपरा आज भी शहर की पहचान बनी हुई है। जहां हर कदम पर प्रशासन की नजर होगी और हर दिल में राम का नाम होगा। दरअसल, रामनवमी के विसर्जन जुलूस को लेकर जिला प्रशासन ने शहर के हर संवेदनशील हिस्से को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था का पूरा खाका तैयार किया है, ताकि सड़कों की दिशा, भीड़ की चाल और आस्था की लय, सब कुछ प्रशासनिक अनुशासन के साथ बहता नजर आए। इसे लेकर करीब 2 हजार जवानों की तैनाती, 340 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और 8 ड्रोन कैमरों की जद में पूरा शहर रहेगा। यानी, हर स्तर पर सख्त पहरा होगा। जिसमें चूक की कोई गुंजाइश नहीं होगी। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उस सतर्कता का नक्शा हैं, जिसे जमीन पर उतारा गया है। रामनवमी को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। इसी क्रम में एसटीएफ डीआईजी इंद्रजीत महथा ने शहर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया। उन्होंने उन मार्गों और क्षेत्रों का विशेष रूप से निरीक्षण किया, जहां से जुलूस और शोभा यात्राएं गुजरेगी। जमशेदपुर के डीसी कर्ण सत्यार्थी, सीनियर एसपी पीयूष पांडेय और सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने भी विभिन्न जुलूस मार्गो और प्रमुख विसर्जन स्थलों का जायजा लिया। वहीं, रुरल एसपी ऋषभ गर्ग ने ग्रामीण क्षेत्रों में मोर्चा संभाला। इस दौरान साफ संदेश था कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा में किसी भी तरह की चूक या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं, डीआईजी इंद्रजीत माहथा ने जिले के सभी वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर रामनवमी को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए। सभी डीएसपी और थाना प्रभारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता, लगातार पेट्रोलिंग, रूट मार्किंग और अंतिम समय तक इंटेलिजेंस इनपुट जुटाने को कहा। साथ ही वरीय अधिकारी को सभी सेंसेटिव जोन में खुद मौजूद रहकर मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया। 

 ऐसे में शहर की सुरक्षा सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहेगी। इस बार जुलूस की निगरानी सड़क से लेकर आसमान तक की जाएगी। पूरे शहर को 13 सुपर जोन और 35 जोन में विभाजित किया गया है। सुपर जोन की जिम्मेदारी झारखंड प्रशासनिक सेवा के वरीय अधिकारियों को सौंपी गई है, जिनके साथ डीएसपी स्तर के अधिकारी तैनात किए गए हैं, जबकि 35 जोन की जिम्मेदारी राजपत्रित अधिकारियों को दी गई है। इसके अलावा प्रशासन की ओर से 313 दंडाधिकारी और करीब 2 हजार पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवानों की तैनाती की गई है। शोभा यात्रा और विसर्जन मार्गो को भी आठ सेवटर में बांटकर 40 दंडाधिकारी और पुलिस बल को प्रतिनियुक्त किया गया है। इस दौरान 8 ड्रोन कैमरे पूरे शहर की गतिविधियों पर नजर रखेंगे, जबकि 340 सीसीटीवी कैमरे हर चौराहे, हर मार्ग और भीड़भाड़ वाले इलाके को कवर करेंगे। शहर में पहले से मौजूद 206 कैमरों के साथ 134 नए कैमरे भी जोड़े गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाते हुए शहर के 38 संवेदनशील प्वाइंट्स पर बैरिकेडिंग की गई है और स्थानों पर ड्रॉप गेट्स लगाए गए है। जबकि सभी 17 थाना क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी दिखाने के लिए लगातार फ्लैग मार्च किया जा रहा है। इसके अलावा कुल 2 हजार जवानों में 1300 जिला पुलिस, जबकि आरएपी, एसएसबी, जैप, झारखंड जगुआर, रैपिड एक्शन फोर्स और होमगार्ड के 600 से 700 जवान अतिरिक्त सुरक्षा घेरा बनाएंगे। वहीं, संवेदनशील इलाकों में जैप और क्यूआरटी की विशेष तैनाती की गई है। साथ ही महिला पुलिसकर्मी सादे लिबास में जुलूस के बीच असामाजिक तत्वों पर नजर रखेंगी। शहर के मानगो, साकची, सीतारामडेरा, गोलमुरी, बर्मामाइंस, कदमा, जुगसलाईं, पोटका और मुसाबनी को अति संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया गया है। वही पूर्व में हंगामा करने वालों की सूची तैयार कर निगरानी बढ़ाई गई है।
दूसरी ओर रामनवमी के मद्देनजर शहर में करीब अखाड़ों की गतिविधियां रहेंगी, जिनमें 168 लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी अखाड़े शामिल हैं। 28 मार्च को शहर में अखाड़ों का विसर्जन जुलूस निकलेगा, जिसके लिए विशेष सुरक्षा तैनाती की गई है। झंडा विसर्जन के मद्देनजर जमशेदपुर के सभी घाटों को समतल कर बैरिकेडिंग कर दिया गया है। साथ ही विसर्जन मार्गो और घाटों पर रोशनी की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त फोर्स और घाटों पर गोताखोर तैनात किए गए है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके। सभी प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर वॉच टावर बनाये जा रहे है। जहां से भीड़ पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके। कंपोजिट कंट्रोल रूम (CCR) को इस बार सुरक्षा का नर्व सेंटर बनाया गया है। यहां से पीसीआर और टाइगर मोबाइल को लगातार मॉनिटर किया जाएगा। इस दौरान दिन हो या रात, सभी धार्मिक स्थलों पर विशेष नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरह का तनाव या उन्माद पनपने न पाए। ऐसे में सभी अखाड़ा जुलूस निर्धारित मार्ग से ही निकलेगा, इनमें बदलाव की अनुमति नहीं होगी। जुलूस के दौरान भड़काऊ भाषण, गाना और तेज डीजे पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही जुलूस में पशु शामिल करने, पटाखा और आग के खेल पर रोक लगाई गई है। इस दौरान सभी अखाड़ों को जुलूस की वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य किया गया है।
डिजिटल मोर्चे पर भी पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी प्रशासन की रडार पर है। पुलिस की सभी टेक सेल 24 घंटे ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रहा है। वहीं अलग से एक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट भी तैयार की गई है। ऐसे में साफ चेतावनी दी गई है कि किसी भी भड़काऊ पोस्ट या धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री पर तत्काल कार्रवाई की जायेगी। वहीं, भीड़ नियंत्रण के लिए शहर को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। हर जोन में बाइक पेट्रोलिंग टीम तैनात रहेगी, जो लगातार मूवमेंट में रहकर स्थिति पर नजर रखेगी। माइक्रोफोन सिस्टम और वॉच टावर के जरिए भीड़ को नियंत्रित और निर्देशित किया जाएगा। यातायात व्यवस्था को भी पूरी तरह से री-डिजाइन किया गया है। 27 मार्च को सुबह 6 बजे से 11:30 बजे तक और दोपहर 1 बजे से रात 11 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। वहीं 28 मार्च को दोपहर 1 बजे से 29 मार्च की सुबह 6 बजे तक सभी मालवाहक और बसों का परिचालन बंद रहेगा। लंबी दूरी की बसों को पारडीह चौक और डोबो से संचालित किया जाएगा। शहर के प्रमुख मार्गों गोलमुरी, साकची, काशीडीह, बसंत टॉकीज और सुवर्णरेखा घाट तक ऑटो परिचालन भी निर्धारित समय तक बंद रहेगा। शहर के 17 विसर्जन घाटों पर 28 मार्च को 168 अखाड़ों का विसर्जन होगा। इनमें सुवर्णरेखा में सबसे अधिक 53 झंडों का विसर्जन होगा। जुलूस के दौरान करतब दिखाने वाले अखाड़ों के लिए मेडिकल टीम और एंबुलेंस भी हर जोन में तैनात रहेगी, ताकि किसी भी घायल को तुरंत उपचार मिल सके। ऐसे में लौहनगरी इस बार पूरी तरह राममय है। भगवा ध्वजों से सजा शहर, ढोल-नगाड़ों की गूंज और हैरतअंगेज करतबों के बीच निकलने वाला जुलूस आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम पेश करेगा।

 

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