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कैरव अपहरण कांड: अंतरराज्यीय गिरोह के 5 और सदस्य गिरफ्तार, साजिशकर्ताओं ने पुलिस की वर्दी पहन दिया था घटना को अंजाम

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द फॉलोअप डेस्क
जमशेदपुर में चर्चित कैरव गांधी अपहरण कांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बिष्टुपुर निवासी कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले में अंतरराज्यीय गिरोह के पांच और सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही अब तक कुल 11 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, हालांकि गिरोह का मास्टरमाइंड अभी भी फरार है। एसएसपी पीयूष पांडेय ने शनिवार शाम प्रेस वार्ता में बताया कि ताजा छापेमारी में अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह और मनप्रीत सिंह सेखो (लुधियाना, पंजाब), गुरदीत शेर सिंह (लुधियाना, पंजाब), तथा राजकरण यादव और संतोष कुमार उर्फ संतोष विलेन (शेखपुरा, बिहार) को दबोचा गया। पुलिस के अनुसार गिरोह के तार पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और बिहार तक फैले हुए हैं।


जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि साजिशकर्ताओं ने करीब छह महीने पहले ही साकची इलाके में किराये का कमरा लेकर कैरव गांधी की गतिविधियों की रेकी शुरू कर दी थी। 13 जनवरी को अपहरण के दिन अमरिंदर सिंह, गुड्डू, इमरान और रमीज राजा पुलिस की वर्दी पहनकर घटनास्थल पर पहुंचे थे, ताकि किसी को शक न हो। अपहरण के बाद कदमा-सोनारी लिंक रोड से कैरव को स्कॉर्पियो वाहन से चांडिल गोलचक्कर ले जाया गया, जहां उसे फॉर्च्यूनर में शिफ्ट किया गया। इसके बाद रांची के रास्ते होते हुए उसे बिहार के डोभी ले जाया गया और फिर गया जिले के बिसर गांव में छिपाकर रखा गया। पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य एक-दूसरे की असली पहचान से भी अनजान रखे गए थे, ताकि गिरफ्तारी की स्थिति में पूरा नेटवर्क उजागर न हो सके।


एसएसपी ने बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना तेजिंदर पाल सिंह (लुधियाना) अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। इससे पहले बिहार के विभिन्न जिलों से छह अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। 26-27 जनवरी की मध्यरात्रि को कैरव गांधी की सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस की विशेष टीमों ने पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और बिहार में छापेमारी कर इन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद पूरे सिंडिकेट के आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क का और बड़ा खुलासा हो सकता है।