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झारखंडियत के संरक्षण के लिए झारखंड में एक नई क्रांति की नींव रखने का है वक्त- सुदेश महतो

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द फॉलोअप डेस्क

हूल क्रांति के महानायक अमर शहीद सिदो-कान्हू सहित अगणित वीर सपूतों के अविस्मरणीय बलिदान की बदौलत ही आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं। उन्होंने अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों को अपने तीर-धनुष के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया था। उन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि प्रदेश के मजदूर, किसान, नौजवान तथा वंचित वर्ग को हक दिलाकर ही दी जा सकती है। यह बातें झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने हातमा रांची स्थित सिदो-कान्हू पार्क में स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि अब तो आलम यह है कि आज अपने ही राज्य में झारखंडी अपना अस्तित्व, अपनी पहचान की तलाश में हैं। सरकार के कार्यों से ऐसा लग रहा कि स्वतंत्रता सेनानियों, आंदोलनकारियों के सम्मान के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समय एकजुट होकर झारखंड एवं झारखंडियत के संरक्षण के लिए सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना जागृत कर एक नई क्रांति की नींव रखने का वक्त है।

13 मार्च को राज्य भर में होगा न्याय मार्च
केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कहा कि संताल हूल के दौरान वीर शहीद सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हजारों क्रांतिकारियों ने अपनी शहादत दी। लेकिन इतिहास के पन्नों में झारखंड के वीर शहीदों को वो जगह, वो सम्मान नहीं मिला। आजसू पार्टी झारखंड के वीर सपूतों की संघर्ष गाथा को देश-दुनिया तक पहुंचाने हेतु प्रतिबद्ध है और इसे लेकर निरंतर प्रयास भी जारी है। साथ ही उन्होंने कहा कि 13 मार्च को जिलास्तरीय न्याय मार्च के तहत हज़ारों नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी सात सूत्री मांगों को लेकर डीसी कार्यालय की ओर कूच करेंगे।  इस कार्यक्रम को लेकर केन्द्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो तैयारियों को लेकर लगातार समीक्षा बैठक कर रहे हैं। वहीं, रांची जिला के हजारों कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से समाहरणालय की ओर मार्च करेंगे।

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