पाकुड़:
Pakur News: सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन (MDM) की व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। पाकुड़ सदर प्रखंड के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में पिछले करीब सात महीने से मध्याह्न भोजन की राशि बकाया होने का आरोप लगाते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्षों ने उपायुक्त से जल्द भुगतान कराने की मांग की है। भुगतान में देरी के कारण किराना दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं और गैस सिलेंडर आपूर्तिकर्ताओं की लाखों रुपये की राशि फंस गई है। लगातार बढ़ते बकाये से परेशान दुकानदारों ने अब उधार में सामान देना बंद करना शुरू कर दिया है।

उधार में खरीदी जा रही थी भोजन सामग्री
विद्यालय अध्यक्षों की ओर से सौंपे गए आवेदन के अनुसार, बच्चों के लिए भोजन तैयार करने में सरसों तेल, सब्जी, हल्दी, नमक, मसाले और अन्य जरूरी सामग्री स्थानीय दुकानदारों से उधार लेकर खरीदी जाती रही है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण कुछ विद्यालयों पर पांच से सात लाख रुपये या इससे अधिक की देनदारी हो गई है। वहीं, संबंधित लोगों के बयान के अनुसार, कुछ दुकानदारों और आपूर्तिकर्ताओं का बकाया पांच से दस लाख रुपये तक पहुंच गया है।

दुकानदारों ने हाथ खड़े किए, स्कूलों के सामने नई परेशानी
बकाया राशि नहीं मिलने से दुकानदारों के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अब वे आगे उधार पर सामग्री देने से इनकार कर रहे हैं। इससे विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के नियमित संचालन को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि समय रहते भुगतान नहीं हुआ और सामग्री की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो बच्चों के लिए रोजाना भोजन तैयार करना मुश्किल हो सकता है।
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26 विद्यालयों के अध्यक्षों ने उठाई भुगतान की मांग
उपायुक्त को दिए गए आवेदन में पाकुड़ प्रखंड के कुल 26 विद्यालयों के अध्यक्षों के नाम शामिल हैं। इनमें इशाकपुर, इलामी, रहसपुर, अर्जुनपुर, रांदंगा, नवादा, मंत्रमपुर, गोंधलिपुर, सीतापहाड़ी, गोपीनाथपुर, चांदडांगा, पाथरघाटा, तिलभीटा, फरोसा, साहबाजपुर, जयकिष्टोपुर, चामचिची, कुमरपुर, चंद्रपाड़ा, फतेहपुर पहाड़ियाटोला और अन्य विद्यालय शामिल हैं। अध्यक्षों ने जिला प्रशासन से बकाया राशि का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है।
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अधिकारियों से मिला आश्वासन, अब भुगतान का इंतजार
प्रतिनिधिमंडल की ओर से संबंधित अधिकारी से मुलाकात कर समस्या रखे जाने की बात भी सामने आई है। उन्हें मामले के समाधान के लिए डीएससी मैडम से बातचीत करने का आश्वासन मिला है। हालांकि, बकाया राशि के भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं है। विद्यालय अध्यक्षों का कहना है कि आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं होने पर मध्याह्न भोजन योजना का नियमित संचालन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि करीब सात महीने से लंबित भुगतान का समाधान कब होगा? बच्चों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि बकाया भुगतान की प्रक्रिया जल्द पूरी हो और विद्यालयों में सामग्री की आपूर्ति बाधित न हो।