द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा में इन दिनों जामताड़ा वेब सीरीज का वह मशहूर डायलॉग "मेरा नंबर अब आएगा" हकीकत बनता दिख रहा है, लेकिन एक नकारात्मक मोड़ के साथ। यहां के लोग साइबर अपराध नहीं, बल्कि रसोई गैस के एक अदद सिलेंडर के लिए अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। शहर के उपभोक्ताओं के दिलों में यह डर बैठ गया है कि शायद उन्हें खाना पकाने के लिए गैस नसीब नहीं होगा। एक ओर गैस एजेंसी के कार्यालयों के बाहर का नजारा किसी मेले जैसा है, लेकिन यह मेला मजबूरी का है। कड़ाकती धूप और सुबह की पहली किरण के साथ ही लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर लंबी कतारों में लग जाते हैं। घंटों इंतजार के बाद भी सफलता की गारंटी नहीं है। कई उपभोक्ता ऐसे हैं जो पिछले एक सप्ताह से लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन शाम को उन्हें खाली हाथ ही घर लौटना पड़ता है।
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उपभोक्ताओं का कहना है कि एक तरफ ईद का पाक त्योहार नजदीक है, जिसमें घरों में पकवान बनने हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी जरूरत की इस चीज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। एजेंसी पहुंचने पर उन्हें बस एक ही जवाब मिलता है- "स्टॉक नहीं आया है।" स्थानीय निवासियों के अनुसार, घंटों खड़े रहने के बाद खाली हाथ लौटना न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक प्रताड़ना जैसा है।
वहीं दूसरी ओर, गैस एजेंसी के कर्मचारियों का दावा है कि गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है। मुख्य समस्या बुकिंग प्रक्रिया और ई-केवाईसी अपडेट न होने के कारण आ रही है। लोगों के बीच एक पैनिक जैसी स्थिति बन गई है कि गैस खत्म हो जाएगी। इस वजह से अचानक भीड़ बढ़ गई है। खैर सरकार और एजेंसी चाहे जो भी तर्क दे लेकिन धरातल पर जनता तो परेशान है। त्योहार के समय प्रशासन और आपूर्ति विभाग को इस पर त्वरित संज्ञान लेना चाहिए ताकि लोगों की ईद की खुशियां फीकी न पड़ें।