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जामताड़ा में थानेदार सुबह 9 से 11 बजे तक सुनेंगे आमजन की समस्या, फैसला ऑन द स्पॉट

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​जामताड़ा: 

जामताड़ा में पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जनता के अनुकूल बनाने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) शंभू कुमार सिंह ने एक बड़ी पहल की है। अब जिले के आम नागरिकों को अपनी शिकायतों के लिए थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही लंबा इंतजार करना होगा। रविवार को एसपी कार्यालय में आयोजित जिला स्तरीय मासिक अपराध समीक्षा बैठक के दौरान एसपी ने निर्देश दिया कि जिले के सभी थाना प्रभारी प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से दोपहर 11:00 बजे तक अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। इस निर्धारित समय में वे केवल आम जनता की समस्याएं सुनेंगे और यथासंभव मौके पर ही उनका समाधान (ऑन द स्पॉट) सुनिश्चित करेंगे।

​अपराध नियंत्रण और सुरक्षा पर कड़ा रुख
​बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसपी शंभु कुमार सिंह ने कानून-व्यवस्था की वर्तमान स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अपराधियों के मनोबल को तोड़ने के लिए सघन गश्ती, एंटी-क्राइम चेकिंग और नियमित वाहन जांच अभियान में कोई कोताही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

​उपलब्धियां: वारंटों का निष्पादन और गिरफ्तारियां
​समीक्षा बैठक के दौरान पिछले माह की उपलब्धियों का ब्यौरा भी साझा किया गया। एसपी ने बताया कि अप्रैल माह से अब तक कुल 364 वारंटों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया है। विभिन्न गंभीर मामलों में संलिप्त 28 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। विशेष रूप से फतेहपुर और बिंदापाथर थाना क्षेत्रों में हुई लूट, हत्या और धोखाधड़ी जैसे संगीन मामलों में वांछित अपराधियों की धरपकड़ को पुलिस की एक बड़ी कामयाबी बताया गया।

​साइबर अपराध और महिला सुरक्षा पर विशेष नजर
​जामताड़ा की छवि को देखते हुए साइबर अपराध के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने का निर्देश दिया गया है। नारायणपुर, करमाटांड़ और साइबर थाना पुलिस को विशेष रूप से सक्रिय रहने को कहा गया है। साथ ही, महिला उत्पीड़न, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।

​सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जन-जागरूकता
​पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों को केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित न रहकर सामाजिक सुधार की दिशा में भी काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी गांवों में जाकर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करें। इस अभियान के जरिए ग्रामीणों को साइबर ठगी, सड़क सुरक्षा, डायन प्रथा, दहेज और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

​बैठक के अंत में बेहतर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस मौके पर एसडीपीओ, पुलिस उपाधीक्षक और सभी सर्किल इंस्पेक्टर मौजूद थे।

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