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गिरिडीह में महिला दिवस पर जलसहिया का धरना, DC की डांट से शांत हुआ समाहरणालय परिसर, जानें पूरा मामला

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द फॉलोअप डेस्क
धरने पर बैठी यह महिलाएं गिरिडीह जिले के विभिन्न प्रखंड की जलसहिया है जो अपने मानदेय बकाये की भुगतान की मांग को लेकर समाहरणालय परिसर में धरना दे रही थी. इसी दौरान उनका सामना जिले के उपायुक्त रामनिवास यादव से हुआ। वीडियो में देखा जा सकता है कि उपायुक्त धरने पर बैठी जलसहियाओं पर भड़कते हुए उन्हें डांट रहे हैं। जहां पूरे देश में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, वहीं गिरिडीह समाहरणालय परिसर में महिला दिवस के दिन ही जलसहियाओं का धरना प्रदर्शन देखने को मिला। जलसहियाओं का कहना है कि महिला दिवस जैसे अवसर पर उन्हें सम्मानित करने के बजाय अपमानित किया गया।

दरअसल, समाहरणालय परिसर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जल महोत्सव पखवाड़ा के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से जलसहिया शामिल होने पहुंची थीं। कार्यक्रम के दौरान कई जलसहियाओं ने बताया कि उन्हें पिछले लगभग सात महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। इसी मुद्दे को लेकर नाराज जलसहियाओं ने समाहरणालय परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरना पर बैठी जलसहियाओं का आरोप है कि गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के आश्वासन के बाद मानदेय की राशि विभाग को मिल चुकी है, इसके बावजूद अधिकारियों की लापरवाही के कारण भुगतान नहीं किया गया। जलसहियाओं ने समाहरणालय भवन के मुख्य द्वार की सीढ़ियों पर बैठकर अपनी मांग रखी।
इसी दौरान उपायुक्त रामनिवास यादव मुख्य द्वार से कार्यालय जा रहे थे, कि प्रदर्शन कर रही जलसहियाओं का उनसे सामना हो गया। इस दौरान उपायुक्त ने प्रदर्शनकारियों को चिल्लाते हुए अल्टीमेटम दिया कि धरना तुरंत समाप्त न किया गया तो सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उनके कड़क आदेश से कुछ क्षणों के लिए समाहरणालय परिसर में सन्नाटा छा गया। डर के मारे सभी लोग शांत हो गए, बावजूद उपायुक्त ने जोर देकर प्रदर्शन समाप्त करने को कहा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल भी हो गया।  जलसहियाओं ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने बकाया मानदेय की शिकायत उपायुक्त रामनिवास यादव से की, तो उन्हें अपमानित किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महिला दिवस के दिन उन्हें सम्मान देने के बजाय धमकाया गया। उपायुक्त ने धरना समाप्त करने को कहा और न मानने पर जेल भेजने की चेतावनी दी।
इधर पीएचडी विभाग के पदाधिकारी अभिक अंबाला ने बताया कि जिले के दो प्रखंडों में कुल लगभग 2400 जलसहिया कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 200 जलसहियाओं का मानदेय उनके कार्य में लापरवाही के कारण रोका गया है। इन जलसहियाओं से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था, लेकिन विभाग को अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के सम्मान को लेकर आयोजित कार्यक्रम के बीच हुए इस विवाद ने पूरे समाहरणालय परिसर का माहौल गर्म कर दिया और महिला सम्मान को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।

 

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