रांची
अमित मंडल ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में महागठबंधन सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में बालू और अवैध खनन का मुद्दा गंभीर रूप ले चुका है, लेकिन सरकार इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार “बालू से तेल निकालने” का काम कर रही है, यानी असंभव को संभव बताकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
अमित मंडल ने झारखंड में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाईवा और तेज रफ्तार वाहनों के कारण हर दिन 12 से 14 लोगों की मौत हो रही है।

आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि
• वर्ष 2025 में लगभग 4200 मौतें
• वर्ष 2024 में 3659 मौतें
• वर्ष 2023 में 4173 मौतें
उन्होंने कहा कि यह आंकड़े कोरोना काल से भी ज्यादा भयावह हैं, जो कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
मुख्यमंत्री के वादों पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए अमित मंडल ने पूछा कि क्या आज राज्य में गरीबों को मुफ्त बालू मिल रहा है? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में वादा किया था कि गैर-आयकरदाता और गरीबों को घर बनाने के लिए मुफ्त बालू दिया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि-
• क्या हर जिले में टास्कफोर्स बनी?
• क्या बालू घाटों पर सीसीटीवी लगे?
• क्या अवैध खनन पर रोक लगी?

गठबंधन में खींचतान, नेताओं के बयान से बढ़ा विवाद
इस मुद्दे पर गठबंधन के अंदर भी मतभेद सामने आए हैं। के राजू ने खुद राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि माइनिंग माफिया का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और प्रशासन पर उसका दबाव है। वहीं, सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसे “जहरीला सांप” तक बता दिया। इन बयानों से साफ है कि कांग्रेस, झामुमो और राजद के बीच अंदरूनी खींचतान जारी है। अमित मंडल ने पूरे मामले को चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह की बयानबाजी के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। अमित मंडल ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि अगर सच में अवैध बालू खनन को रोकना है तो रोजाना सख्त कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित परिवहन नेटवर्क और उसके संचालकों की गहराई से जांच जरूरी है, तभी सच्चाई सामने आ पाएगी।
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