द फॉलोअप डेस्क
26 जनवरी के बाद राज्य में किसी भी समय नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो सकती है। चुनाव लड़ने को इच्छुक नेताओं को इसकी जानकारी भी है। बावजूद इसके चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं को जानना चाहिए कि उन्हें क्या क्या तैयारी कर लेनी है। निकाय चुनाव लड़ने के लिए क्या आहर्ता और अनहर्ता है। समय रहते वे कैसे गड़बड़ियों को सुधार ले सकते हैं।
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निकाय चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए जरूरी है
-किसी वार्ड या निर्वाचन क्षेत्र से अभ्यर्थी होने के लिए उस व्यक्ति का संबंधित नगरपालिका के किसी वार्ड की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना चाहिए।
-अभ्यर्थी 21 वर्ष के हो चुके होंः
-महापौर और अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का नाम संबंधित नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले मतदाता सूची में दर्ज हो। वे 30वर्ष के हो चुके हों।
-निर्वाचन वर्ष से ठीक पूर्व के वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर उस नगरपालिका के बकाए सभी करों का भुगतान सुनिश्चित हो।
-चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक जीवित संतान नहीं होने चाहिए। लेकिन झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के अनुसार इस अधिनियम के लागू होने ( 9 फरवरी 2012) के एक वर्ष की अवधि (9 फरवरी 2013) की समाप्ति तक किसी व्यक्ति को दो से अधिक संतान है तो वह चुनाव लड़ने के अयोग्य नहीं होगा।
-वार्ड पार्षद और सदस्य पद के लिए संबंधित क्षेत्र के किसी वार्ड की मतदाता सूची में शामिल व्यक्ति किसी वार्ड से अभ्यर्थी हो सकता है, किंतु उस अभ्यर्थी का प्रस्तावक एवं समर्थक उसी वार्ड का मतदाता होना अनिवार्य है जिस वार्ड के लिए अभ्यर्थी द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किया जाएगा।

-महापौर या अध्यक्ष पद के निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी और उसके प्रस्तावक और समर्थक नगरपालिका के अंतर्गत आनेवाले किसी वार्ड का मतदाता हो सकता है।
-जो व्यक्ति मतदाता के रूप में किसी अयोग्यता से ग्रस्त है तो वह किसी भी अभ्यर्थी का प्रस्तावक या समर्थक नहीं हो सकता है।
-महापौर और अध्यक्ष पद के सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए नामांकन शुल्क 5000 रुपए तय है वहीं वार्ड पार्षद सामान्य वर्ग के लिए नामांकन शुल्क 1000 रुपए है।
-अगर कोई भी अभ्यर्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़ा वर्ग से है तो उसे सामान्य वर्ग के उम्मीदवार का आधा नामांकन शुल्क लगेगा।
-अनुसूचित जाति, जनजाति या पिछड़ा वर्ग-1 और 2 का कोई पुरुष या महिला यदि किसी अनारक्षित स्थान से चुनाव लड़ना चाहता है, तब भी उसे नामांकन शुल्क आधा ही लगेगा।

-यदि कोई अभ्यर्थी किसी पद के लिए एक से अधिक प्रति में नामांकन दाखिल करता है तो उसे एक से अधिक नामांकन पत्र का शुल्क जमा नहीं करना होगा। उसे केवल जमा किए गये शुल्क की सत्यापित प्रति दूसरे या अन्य नामांकन पत्र के साथ संलग्न करना होगा।
-लेकिन कोई अभ्यर्थी एक से अधिक पदों के लिए चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे प्रत्येक पद के लिए नामांकन शुल्क जमा करना होगा।
-नामांकन शुल्क निर्वाची पदाधिकारी के पास नाजीर रसीद, मनी रसीद या कोषागार चालान के रूप में जमा कराया जा सकेगा।
-नामांकन शुल्क किसी भी दशा में वापस नहीं होगा।
-नामांकन से पहले आप सुनिश्चित कर लें
मतदाता सूची में आपका और प्रस्तावक या समर्थक का नाम एवं क्रमांक
आपका प्रस्तावक या समर्थक किसी निरर्हता से ग्रस्त तो नहीं है
नामांकन पत्र पर अभ्यर्थी और प्रस्तावक-समर्थक का हस्ताक्षर नहीं है या हस्ताक्षर उनका नहीं है
अनुसूचित जाति, जनजाति या पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का दावा करनेवाले को जाति प्रमाण पत्र संलग्न हो

-निर्वाचन संबंधी व्यय के लिए नामांकन पत्र दाखिल की तिथि से कम से कम एक दिन पूर्व खोले गए बैंक एकाउंट की विवरणी (बैंक पासबुक की अभिप्रमाणित प्रति) नामांकन पत्र के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा
-नामांकन पत्र के साथ शपथ पत्र का तय प्रारूप संलग्न करना जरूरी होगा। यह शपथ पत्र किसी कमिश्नर या प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी या नोटरी पब्लिक के समक्ष दाखिल कर सत्यापित किया जाएगा।
-सामान्यतया किसी अभ्यर्थी को नामांकन पत्र में वही नाम लिखना चाहिए जो मतदाता सूची में दर्ज है। अगर मतदाता सूची में आपके नाम की वर्तनी त्रुटिपूर्ण है या नाम में अशुद्धि है तो आप नामांकन पत्र में अपना नाम शुद्ध रूप में लिख सकते हैं।
-नामांकन पत्र में सही आयु का उल्लेख करना चाहि। यदि मतदाता सूची में आपकी आयु सही आयु से भिन्न है तो आपकी अपनी वर्तमान आयु बतानी चाहिए। यदि आपकी आयु अभ्यर्थिता के लिए न्यूनतम ावश्यक आयु अर्थात 21 या 30 वर्ष के आसपास हो और ऐसी संभावना हो कि आपकी आयु के बारे में किसी अन्य अभ्यर्थी द्वारा आपत्ति उठायी जा सकती है तो आपको अपनी आयु के संबंध में पर्याप्त प्रमाण भी रखना चाहिए।
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-नामांकन पत्र में यदि ओवर राइटिंग या काट-कूट है तो दूसरा नामांकन पत्र दाखिल करना चाहिए। यदि काट कूट या ओवरराइटिंग मामूली है तो उसके ऊपर लघु हस्ताक्षर करना चाहिए।
-कोई भी व्यक्ति एक से अधिक पद के लिए चुनाव लड़ सकेगा।
-चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के अंदर चुनाव खर्च संबंधी लेखा सच्ची प्रतिलिपि में जमा करना अनिवार्य होगा।
-चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को चुनाव खर्च के व्यय की जानकारी देने के लिए एक अलग बैंक खाता खोलना जरूरी होगा। यह बैंक खाता उम्मीदवार खुद के नाम से या चुनाव अभिकर्ता के साथ संयुक्त रूप से राज्य के किसी भी बैंक में खोल सकता है।
-यदि बैंक खाता नामांकन पत्र दाखिल करने से पूर्व नहीं खोला गया हो या कोई भी धन राशि उक्त बैंक खाता में जमा किए बिना खर्च की जाती है तो यह माना जाएगा कि सही तरीके से चुनाव खर्च का संधारण नहीं किया गया है।
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