द फॉलोअप डेस्क
रांची में सेना की जमीन व अन्य विवादित जमीनों की खरीद-बिक्री में भ्रष्टाचार के आरोपी IAS छवि रंजन को जेल भेजा गया है। पूजा सिंघल के बाद दूसरे आईएएस ऑफिसर हैं जिसे बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में रहना होगा। दरअसल जमीन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किए गए छवि रंजन को ईडी ने शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट से ईडी ने छवि रंजन को रिमांड पर लेकर पूछताछ की इजाजत मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मतलब वर्तमान में उनका ठिकाना जेल होगा। मालूम हो कि कोर्ट में पेश करने से पहले सदर अस्पताल के डॉक्टरों की देखरेख में शुक्रवार को छवि रंजन की मेडिकल जांच की गई। छवि रंजन का बीपी, सुगर, पल्स सभी सामान्य पाया गया। साथ ही उनका कोविड टेस्ट भी निगेटिव आया।

इसलिए ईडी की रडार पर थे छवि
रांची के डीसी रहने के दौरान छवि के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर फर्जी कागजों के आधार पर जमीन की खरीद बिक्री की बात सामने आई। इनमें सबसे प्रमुख बरियातू स्थित सेना की जमीन थी। जांच में यह सामने आया कि बरियातू में सेना की 4.55 एकड़ जमीन को फर्जी कागजात के जरिए कोलकाता के प्रदीप बागची ने जगत बंधु टी एस्टेट को बेच दी थी। इस जमीन की सरकारी दर 20 करोड़ 75 लाख 84200 रुपये थी। लेकिन इसकी बिक्री महज 7 करोड़ शो की गई। इसमें भी 25 लाख रुपये प्रदीप बागची के खाते में आए थे। बाकी बचे पैसों के संबंध में डीड में जानकारी दी गई कि इसे चेक से भुगतान किया गया। मगर जब ईडी ने चेक के जरिए भुगतान किए जाने की जांच की तो सामने आया कि खातों में पैसे गए ही नहीं। यानी, खरीद-बिक्री को सही दर्शाने के लिए चेक से राशि भुगतान की गलत जानकारी डीड में दी गई थी। बताया जा रहा है कि ईडी ने अपनी जांच में यह भी कहा परिजनों के खातों में बड़े ट्रांजेक्शन और लाभान्वित होने के सबूत ईडी को मिले हैं। जमीन की रजिस्ट्री करने वाले सब रजिस्ट्रार घासीराम पिंगुआ ने भी अपने बयान में बताया था कि डीसी के आदेश पर उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री की थी। रांची के बजरा में भी 7.16 एकड़ जमीन की घेराबंदी से लेकर म्यूटेशन तक में डीसी रहते छवि रंजन की भूमिका काफी संदेहास्पद रही।

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