द फॉलोअप डेस्क
गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने में मदद करने के लिए झारखंड सरकार ने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (GSCC) योजना प्रारंभ कर रखी है। इसके तहत अभी तक हजारों छात्रों को विभिन्न बैंकों से ऋण भी प्राप्त हुए हैं। लेकिन गुरुजी क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण लेनेवाले अधिकांश अभिभावक परेशान हैं। परेशानी का सबब यह है कि उनसे बैंक उच्च दर पर इंटरेस्ट ले रहा है। राज्य सरकार द्वारा मार्जिन मनी का भुगतान करने के बावजूद अभिभावकों को उनका मार्जिन मनी वापस नहीं हो रहा है। मध्यम और सामान्य परिवार के ऐसे अभिभावक इससे बुरी तरह परेशान हैं। हालांकि उच्च शिक्षा निदेशक ने 27 जनवरी को गुरुजी क्रेडिट कार्ड को लेकर उच्चस्तरीय बैठक बुलायी है। इसमें विभिन्न बैंकों के अधिकारी भी शामिल होंगे। बैठक में ऋण देने, मार्जिन मनी की वापसी व अन्य विसंगतियों और समस्याओं को दूर किया जाएगा।
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क्या हो रही अभिभावकों को परेशानी
झारखंड सरकार की गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (GSCC) योजना आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस योजना के तहत छात्रों को उच्च शिक्षा (इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, प्रबंधन आदि) के लिए अधिकतम 15 लाख रुपये तक का ऋण ले सकते हैं। इस ऋण पर मात्र 4% वार्षिक साधारण ब्याज (Simple Interest) लगने का प्रावधान है। इसके तहत राज्य के हजारों छात्रों ने चिह्नित बैंकों से ऋण लिया है।
इन बैंकों का नोडल बैंक एचडीएफसी को बनाया गया है। अब हो यह रहा है कि विभिन्न बैंकों द्वारा स्वीकृत ऋण पर उस बैंक का निर्धारित इंटरेस्ट लिया जा रहा है। मसलन 10 से 1.56 फीसदी तक इंटरेस्ट लिया जा रहा है। जबकि प्रावधान के अनुसार अभिभावकों से मात्र चार फीसदी ही इंटरेस्ट लिया जाना है। बीच की मार्जिन मनी अर्थात 6 से त्र 6.56 फीसदी अतिरिक्त इंटरेस्ट की राशि अभिभावकों को वापस किया जाना है।
अतिरिक्त इंटरेस्ट की राशि को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नोडल बैंक एचडीएफसी को देता है। फिर ऋण की राशि व पूरा आंकड़ा उपलब्ध कराने पर एचडीएफसी अन्य बैंकों को वह राशि वापस करता। उसके बाद संबंधित बैंक द्वारा अभिभावकों को इंटरेस्ट की अतिरिक्त मार्जिन मनी को वापस करना है। लेकिन मार्जिन मनी की राशि अभिभावकों को वापस नहीं हो रही है।
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हालांकि जानकारों का कहना है कि अतिरिक्त मार्जिन मनी की अभिभावकों को वापस होनी ही है। आज हो या कल। लेकिन पेंच यह है कि अगर किसी अभिभावक को साल भर में 50 हजार रुपए इंटरेस्ट के रूप में अधिक राशि देनी पड़ गयी है और उस राशि का भुगतान एक साल बाद होगा तो फिर उस पर मिलनेवाले इंटरेस्ट से अभिभावक वंचित होंगे। साथ ही इतनी बड़ी राशि के नहीं मिलने से गरीब व मध्यम तबके के अभिभावक या छात्रों के माता-पिता आर्थिक रूप से परेशान हैं। उनके लिए अपने बच्चे की समय पर अन्य तरह के खर्च का वहन करना मुश्किल हो रहा है।
