द फॉलोअप डेस्क
हेमलाल मुर्मू ने सदन में अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से अपनी ही सरकार से कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, तो राज्य में अपराध की घटनाएं कैसे बढ़ रही हैं। हेमलाल मुर्मू ने जेल से फरारी, नशीले पदार्थों की खेती और साइबर अपराध के बढ़ते मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने विशेष रूप से संथाल परगना में साइबर अपराध की अधिक घटनाओं पर चिंता जताते हुए पूछा कि वहां शिक्षित पुलिसकर्मियों की नियुक्ति और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं या नहीं। यदि ऐसे अभियान चलाए जा रहे हैं, तो उनका विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध कराया जाए। सरकार की ओर से मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि साइबर अपराध के 95 प्रतिशत मामलों में रिकवरी की गई है और अपराधियों की पहचान की गई है। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हालांकि, भाजपा विधायक नीरा यादव ने मंत्री के दावों का खंडन करते हुए प्रस्तुत आंकड़ों को गलत बताया।
हेमलाल मुर्मू ने सदन में वर्ष 2024 और 2025 के आंकड़े भी प्रस्तुत किए। उनके अनुसार, वर्ष 2024 में साइबर अपराध के 1498 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 919 लोगों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन कोई भी व्यक्ति दोषी सिद्ध नहीं हुआ और तीन लोग दोषमुक्त हुए। वहीं वर्ष 2025 में 1413 मामले दर्ज हुए, जिनमें 1268 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें केवल 37 लोग दोषी सिद्ध हुए और 387 लोग दोषमुक्त हुए। हेमलाल मुर्मू ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस सही ढंग से अनुसंधान कर साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत कर रही है, तो आरोपित दोषी सिद्ध क्यों नहीं हो पा रहे हैं।
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