द फॉलोअप, रांची
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी को द फॉलोअप न्यूज पर चली एक खबर से तीखी मिर्ची लग गयी है। प्रसारित खबर रांची में एक मेडिकल छात्रा के साथ हुए रेप से जुड़ा है। मीडिया कर्मियों द्वारा रेप से जुड़े सवाल पर वह बोल रहे हैं कि क्या यह बिहार का है। उनके जवाब पर खबर में उनकी जानकारी पर कई तरह के सवाल खड़े किए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री इन सवालों पर तिलमिला गए हैं। उन्होंने अपने वकील अमितेश कुमार जीशेन के माध्यम से द फॉलोअप डॉट इन को एक लीगल नोटिस भेजा है। लीगल नोटिस में कहा गया है कि 17 अप्रैल 2026 को प्रसारित वीडियो में मंत्री के खिलाफ अपमानजनक, भ्रामक और मानहानिकारक टिप्पणियां की गईं। इसमें कथित तौर पर मंत्री की तुलना आपत्तिजनक तरीके से की गई और ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

मंत्री के वकील का कहना है कि यह कंटेंट पत्रकारिता के दायरे में नहीं आता, बल्कि एक सुनियोजित तरीके से उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि इस तरह की सामग्री अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत संरक्षित नहीं है, क्योंकि इसमें मानहानि और दुर्भावनापूर्ण तत्व शामिल हैं। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि इस वीडियो के कारण मंत्री की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा, मानसिक तनाव हुआ और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। लीगल नोटिस में विवादित वीडियो को तुरंत हटाने, सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने, प्रमुखता के साथ खंडन प्रकाशित करने और भविष्य में ऐसी सामग्री प्रकाशित न करने का लिखित आश्वासन देने की मांग की गयी है। ऐसा नहीं करने पर मंत्री की ओर से 10 करोड़ के मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी गयी है। यह भी कहा गया है कि यदि 7 दिनों के भीतर इन मांगों का पालन नहीं किया गया, तो द फॉलोअप के खिलाफ सिविल और आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

वीडियो में इस्तेमाल किए गए कथित शब्दों और लाइनों को रेखांकित भी किया गया है। “यह युगांडा के पशुपालन मंत्री एहसान कुरैशी हैं… नहीं… यह झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हैं।” “यह आदमी झारखंड का स्वास्थ्य मंत्री है कि युगांडा का पशुपालन मंत्री?” “इतनी बेशर्मी… इतनी बेहयाई…”
“मंत्री जी और भारतीय करेंसी में होड़ लगी है कि कौन ज्यादा गिरेगा…” लीगल नोटिस में कहा गया है कि यह पत्रकारिता नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश है।
इसका उद्देश्य मंत्री की छवि खराब करना और मजाक उड़ाना है

द फॉलोअप का जवाब
रांची में एक मेडिकल छात्रा के साथ हुए रेप की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री को नहीं होना, कई तरह के सवाल खड़े कर रहे थे। प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी समेत कई अन्य नेताओं, संगठनों ने इस घटना की तीखी निंदा की थी। इस घटना पर भाजपा ने मंत्री और सरकार पर तीखी टिप्पणी भी की थी। पत्रकारिता धर्म का पालन करते हुए द फॉलोअप ने तंजात्मक लहजे में मंत्री जी को जनता के प्रति उनके उत्तरदायित्व को बताने की कोशिश की थी। यह कहीं से असंवैधानिक, नियम विरुद्ध या गलत नहीं है। पत्रकारिता की मूल जिम्मेदारी ही माननीयों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है। और उस वीडियो में यही किया गया है। द फॉलोअप को अफसोस बस इतना है कि समय समय पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से जो बयान दिए है, जिसमें, सत्ता, शासन और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए टाइम बाउंड घोषणा की है, उसको भी याद कर लेना चाहिए। उसके पूरा नहीं होने पर उन्हें भी राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। और अगर वह सही हैं तो जनता के विरुद्ध मानहानि के मुकदमें के लिए लीगल नोटिस भेजना चाहिए था। क्योंकि जब वह कोलकाता में कैश के साथ गिरफ्तार हुए थे, उस समय भी झारखंड और यहां की साढे तीन करोड़ जनता की बदनामी हुई थी। राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का सिर शर्म से झुक गया था। वैसे मंत्री जी को स्वास्थ्य विभाग में जारी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में तत्परता से उन्मुख होना चाहिए था। खैर यह मंत्री इरफान अंसारी की प्राथमिकता का सवाल है। उनके लिए कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद पर अंकुश लगाना ज्यादा जरूरी है या इन सब गड़बड़ियों को उजागर करने या उनके संज्ञान में लानेवाली पत्रकारिता के विरुद्ध लीगल नोटिस भेजना। वह माननीय हैं, इसलिए जरूर ज्यादा जानकार और समझदार हैं।